मध्य प्रदेश में पुलों के खराब डिज़ाइन और अधूरी निर्माण प्रक्रियाओं को लेकर मची खासी चर्चा के बीच अब राज्य सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने पूरे प्रदेश के पुलों की संपूर्ण जांच का आदेश दिया है। हर जिले से रिपोर्ट मांगी गई है और जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति भी गठित की जा रही है। विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने साफ कहा है कि अब लापरवाही और गलत इंजीनियरिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और कहा है कि अब जांच के नाम पर बस दिखावा किया जा रहा है।
पुलों की डिज़ाइन में लापरवाही से बढ़ी जनता की चिंता
मध्य प्रदेश में पुलों के डिज़ाइन की खराबी के कई ताजा उदाहरण सामने आए हैं। भोपाल के ऐशबाग पुल की तीव्र 90 डिग्री की मुड़ाई सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इसे दुर्घटना का क्षेत्र बनने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, इंदौर के जेड आकार के पुल में दो 90 डिग्री के मोड़ हैं, जिससे ट्रैफिक की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। भोपाल का सुभाष नगर फ्लाईओवर सांप की तरह घुमावदार है और उसमें डिवाइडर भी नहीं है। हाल ही में यहां हुए कई हादसों के बाद अब उस पुल पर तेज रफ्तार रोकने के लिए स्पीड ब्रेकर लगाए जा रहे हैं।

पुराने और जर्जर पुलों की स्थिति चिंताजनक
मध्य प्रदेश में ब्रिटिश काल के 100 से अधिक पुल अब कमजोर हो चुके हैं। नर्मदापुरम का सुखतावा पुल पहले ही गिर चुका है। खंडवा का पुल, जिसे एनएचएआई और एमपीआरडीसी दोनों ने खतरनाक घोषित किया है, फिर भी भारी वाहन उस पर गुजर रहे हैं। नरसिंहपुर में 6 करोड़ रुपये के एक पुल का निर्माण 7 सालों से अधूरा पड़ा है। कई जगहों पर ठेकेदार निर्माण के बीच में ही काम छोड़ देते हैं या घटिया सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। ये सारी बातें प्रदेश के पुलों की हालत की गंभीरता को दर्शाती हैं।
नेताओं की प्रतिक्रियाएं और सरकार का रूख
इस मुद्दे पर कई नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जहां भी डिज़ाइन में गलती या निर्माण अधूरा पाया जाएगा, वहां कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐशबाग पुल मामले में 7 अधिकारियों को दंडित किया जा चुका है। वहीं, कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि MP में पुल नहीं भ्रष्टाचार के स्मारक बन रहे हैं। जनता के दबाव में आने पर ही सरकार को जांच का ख्याल आया है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब जनता ये देख रही है कि पुलों की हालत सुधरती है या नहीं।







