मुरैना में गरियाल तस्करों का भंडाफोड़, पुलिस और वन विभाग की छापेमारी में 30 गरियाल बरामद

By: MPLive Team

On: Sunday, July 13, 2025 3:15 PM

मुरैना में गरियाल तस्करों का भंडाफोड़, पुलिस और वन विभाग की छापेमारी में 30 गरियाल बरामद
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मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के जौरा कस्बे से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां वन विभाग की टीम ने पुलिस के साथ मिलकर घड़ियालों की तस्करी करने वाले तीन आरोपियों को धर दबोचा है। ये तीनों एक कार में 30 छोटे-छोटे घड़ियाल भरकर तस्करी करने जा रहे थे। इन घड़ियालों को सफेद रंग की एक गाड़ी में पान मसाले के डिब्बों के बीच छिपाकर ले जाया जा रहा था। लेकिन समय रहते वन विभाग और पुलिस ने मिलकर इन तस्करों को दबोच लिया।

सूचना मिलते ही पुलिस ने शुरू की जांच

जौरा वन विभाग के उप रेंजर विनोद उपाध्याय को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ तस्कर पान मसाले की पेटियों में घड़ियाल भरकर ले जा रहे हैं। उन्होंने तुरंत जौरा थाना प्रभारी उदयभान सिंह यादव और एसडीओपी नितिन बघेल को इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने हाईवे पर गाड़ियों की सघन जांच शुरू कर दी। तभी एक सफेद रंग की चार पहिया गाड़ी आती दिखी। जब पुलिस ने उसे रोका और उसकी तलाशी ली तो पान मसाले की पेटियों में से 30 छोटे-छोटे घड़ियाल बरामद हुए।

मुरैना में गरियाल तस्करों का भंडाफोड़, पुलिस और वन विभाग की छापेमारी में 30 गरियाल बरामद

घड़ियाल वन विभाग को सौंपे, आरोपी गिरफ्तार

गाड़ी में मौजूद तीनों आरोपियों को पुलिस ने मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया और थाने ले आई। पूछताछ में इनकी पहचान रघु आदिवासी (मौरानीपुर, यूपी), विजय गौर (ग्वालियर) और रामवीर सिंह (ग्वालियर) के रूप में हुई है। पकड़े गए 30 घड़ियालों को वन विभाग को सौंप दिया गया है। घड़ियालों को सुरक्षित रखने और उनकी देखभाल के लिए वन विभाग की टीम ने विशेष व्यवस्था की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन घड़ियालों को कहां ले जाया जा रहा था और इन तस्करों के पीछे कौन-से गिरोह सक्रिय हैं।

चंबल के बटेश्वर घाट से पकड़े गए घड़ियाल

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह सभी घड़ियाल बटेश्वर घाट, चंबल नदी से पकड़े गए हैं। चंबल नदी जैव विविधता के लिए मशहूर है और घड़ियाल जैसे दुर्लभ और संकटग्रस्त जीवों का घर मानी जाती है। घड़ियाल को ‘फिश ईटिंग क्रोकोडाइल’ भी कहा जाता है क्योंकि वह केवल मछलियां खाते हैं। इनकी तस्करी पूरी तरह से प्रतिबंधित है और यह वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत संरक्षित हैं। ऐसे में इनकी तस्करी करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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