सावन का पावन महीना शुरू हो चुका है और आज इसका पहला सोमवार है। पूरे देश में भगवान शिव के भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। सावन का पहला सोमवार इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि सोमवार का दिन स्वयं भोलेनाथ को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं। लोगों का मानना है कि सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना करने से विशेष पुण्य और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
गौरी के तप से प्रसन्न हुए शिव, इस महीने को माना गया पवित्र
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी सावन महीने में माता पार्वती (गौरी) के कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था। तभी से यह महीना शिव-पार्वती के मिलन का प्रतीक बन गया है। कहा जाता है कि सावन में भगवान शिव अपने ससुराल जाते हैं और धरती पर विशेष रूप से अपनी कृपा बरसाते हैं। यही कारण है कि शिव भक्त इस पूरे महीने व्रत, उपवास और शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा करते हैं। विशेष रूप से सोमवार के दिन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
देशभर के शिव मंदिरों में लगी भक्तों की लंबी कतारें
सावन के पहले सोमवार पर देशभर के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर में सुबह-सुबह आरती के साथ दिन की शुरुआत हुई और भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। दिल्ली के गौरी शंकर मंदिर में भी श्रद्धालु शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए तड़के से लाइन में लगे रहे। गाजियाबाद के दूधेश्वर महादेव मंदिर, अयोध्या के क्षीरेश्वरनाथ मंदिर और प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर में भी भक्तों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में तो भक्तों की लंबी लाइन सुबह से ही दिखाई दी, जहां हजारों लोग जलाभिषेक के लिए पहुंचे।
देवघर से गुवाहाटी तक गूंजा ‘हर हर महादेव’
झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम में भी आज सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। लोग दूर-दूर से जल लेकर यहां बाबा भोलेनाथ को अर्पित करने पहुंचे। गुवाहाटी के शुकेश्वर मंदिर में भी शिव भक्तों ने पूजा-अर्चना कर सावन के पहले सोमवार की शुरुआत की। वहीं, गोरखपुर के झारखंडी महादेव मंदिर में भी शिवभक्ति की धूम रही। सभी मंदिरों में “बोल बम”, “हर हर महादेव” और “जय शिव शंकर” के जयघोष गूंजते रहे। प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हुए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।







