यमन की अदालत ने भारतीय नर्स निंमिषा प्रिया को एक स्थानीय नागरिक की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई है। इसके बाद से निंमिषा की जान बचाने के लिए कई तरफ से प्रयास तेज़ हो गए हैं। संभावना है कि 16 जुलाई को यमन में उनकी फांसी हो सकती है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि निंमिषा को फांसी से बचाया जा सके। नर्स के परिवार के साथ-साथ कई राजनीतिक पार्टियां और संगठनों ने भी भारत सरकार से इस मामले में कूटनीतिक मदद करने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि वे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और हर संभव मदद दे रहे हैं।
केंद्र सरकार को कूटनीतिक हस्तक्षेप का निर्देश देने की मांग
इसी बीच, निंमिषा प्रिया को बचाने के लिए दायर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। याचिका में केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह कूटनीतिक माध्यम से यमन सरकार से संपर्क कर निंमिषा को फांसी से बचाने का प्रयास करे। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जज विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच करेगी। इस याचिका को ‘सेव निंमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ नामक संगठन ने दायर किया है, जो निंमिषा को कानूनी सहायता भी दे रहा है। ये संगठन लगातार सरकार से अपील कर रहा है कि वे इस मामले में ज़्यादा सक्रिय भूमिका निभाएं।

निंमिषा पर लगी गंभीर आरोपों की जानकारी
यमन की अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक, निंमिषा पर आरोप है कि उसने जुलाई 2017 में अपने स्थानीय बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या की। कहा गया है कि निंमिषा ने महदी को नशे की दवाई देकर उसकी हत्या की, और एक अन्य नर्स की मदद से उसके शरीर को टुकड़ों में काटकर भूमिगत टैंक में फेंक दिया। निंमिषा को तब गिरफ्तार किया गया जब ये हत्या उजागर हुई। नर्स के परिवार का कहना है कि उसने महदी को केवल उनकी जब्त पासपोर्ट वापिस लेने के लिए एनेस्थीसिया दिया था, लेकिन वह दवाई की ओवरडोज़ की वजह से मौत हो गई। यमन की सना की अदालत ने निंमिषा को मौत की सजा सुनाई, जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन उनकी अपील ठुकरा दी गई। बाद में निंमिषा ने यमन के राष्ट्रपति से भी माफी की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें माफ़ी नहीं मिली। वह अभी सना के जेल में बंद है।
निंमिषा का परिवार और राजनीतिक समर्थन
जानकारी के अनुसार, निंमिषा 2008 से यमन में नर्सिंग का काम कर रही थी। 2011 में शादी के बाद वह अपने पति टॉमी थॉमस के साथ यमन गईं। 2014 में यमन में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद उनके पति और बेटी वापस केरल आ गए, जबकि निंमिषा यमन में ही रहीं। मृतक महदी के परिवार ने ‘खून का बदला’ या मुआवज़ा लेने से भी इंकार कर दिया है। इस बीच, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि वे इस मामले को यमन की सरकार के सामने तत्काल उठाएं ताकि निंमिषा की जान बच सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कूटनीतिक प्रयास किए बिना उनकी फांसी को रोका नहीं जा सकता। इस मामले को लेकर देश में चिंता बढ़ती जा रही है और हर कोई निंमिषा के लिए न्याय की गुहार लगा रहा है।







