ज्वालापुर कांवड़ यात्रा में शिवभक्त ने गले पर चाकू मारकर की आत्महत्या की कोशिश, पुलिस जांच में जुटी

By: MPLive Team

On: Tuesday, July 15, 2025 7:10 PM

ज्वालापुर कांवड़ यात्रा में शिवभक्त ने गले पर चाकू मारकर की आत्महत्या की कोशिश, पुलिस जांच में जुटी
Google News
Follow Us
---Advertisement---

हरिद्वार के ज्वालापुर में कांवड़ यात्रा के दौरान एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। रोहतक निवासी 23 वर्षीय प्रवीण कुमार ने भीड़ के बीच जर्स कंट्री बीच चौराहे की रेड लाइट पर खुद को चाकू मारकर गला रेत लिया। घटना के समय वह कांवड़ यात्रा में शामिल होकर जल लेकर जा रहा था। अचानक हुई इस घटना के बाद वहां मौजूद शिवभक्तों में हड़कंप मच गया। शिवभक्तों ने घायल प्रवीण को तुरंत संभाला और पुलिस को घटना की सूचना दी। घटना स्थल पर खून बुरी तरह से बह रहा था और कुछ ही देर में पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई।

शिवभक्तों ने पहुंचाई मदद, पुलिस ने शुरू की जांच

मौके पर पहुंचे शिवभक्तों ने घायल अवस्था में प्रवीण को 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने तुरंत उपचार शुरू किया और गले में कई टांके लगाए। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंचाने से उसकी जान बच सकी। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। वहीं, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आत्महत्या के प्रयास के पीछे की वजह जानने का प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद कांवड़ियों और चश्मदीदों से पूछताछ कर रहे हैं ताकि घटना के पीछे की सच्चाई सामने आ सके।

आत्महत्या के प्रयास का कारण बना रहस्य

पुलिस के अनुसार, अभी तक इस घटना के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है और प्रवीण कुमार ने ऐसा कदम क्यों उठाया, यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान इस प्रकार का आत्मघाती कदम बेहद असामान्य है, क्योंकि यह यात्रा श्रद्धा, भक्ति और तपस्या का प्रतीक मानी जाती है। पुलिस परिवार और दोस्तों से भी संपर्क कर रही है ताकि यह पता चल सके कि प्रवीण किसी मानसिक तनाव में था या किसी व्यक्तिगत समस्या का सामना कर रहा था। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही वास्तविक कारण सामने आ सकेगा।

कांवड़ यात्रा: शिवभक्तों की आस्था और तपस्या की प्रतीक

गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा सावन के महीने में शिवभक्तों द्वारा गंगा जल लाकर भगवान शिव को अर्पित करने के लिए की जाती है। कांवड़िए गंगा नदी से जल भरकर कांवड़ (बांस की लकड़ी पर दो घड़े लटकाकर) में रखते हैं और पैदल यात्रा करते हैं। यह यात्रा उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और बिहार में श्रद्धा और आस्था के साथ की जाती है। कांवड़िए अक्सर नंगे पांव चलते हैं, भगवा वस्त्र पहनते हैं और यात्रा के दौरान भजन और शिव चालीसा गाते रहते हैं। यह यात्रा भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति, श्रद्धा और त्याग का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़ यात्रा के दौरान पूरे मार्ग पर सेवा शिविर लगाए जाते हैं, जहां भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता दी जाती है। इस घटना के बावजूद, लाखों कांवड़िए पूरी आस्था के साथ अपनी यात्रा को जारी रखते हैं और शिवरात्रि के अवसर पर जल अर्पित कर अपनी तपस्या पूर्ण करते हैं।

For Feedback - devendra.abpnews@gmail.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment