India-US Trade Agreement: अमेरिका को नहीं दी छूट, भारत ने अपनी शर्तों पर कसा शिकंजा! अब भारत बनेगा निर्यातक

By: MPLive Team

On: Thursday, July 17, 2025 3:06 PM

India-US Trade Agreement: अमेरिका को नहीं दी छूट, भारत ने अपनी शर्तों पर कसा शिकंजा! अब भारत बनेगा निर्यातक
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India-US Trade Agreement: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के अध्यक्ष एस महेंद्र देव ने साफ शब्दों में कहा कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौता अपने शर्तों और राष्ट्रीय हितों के अनुसार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) करता है तो उसकी कोशिश होती है कि देश के निर्यात को बढ़ावा मिले और घरेलू उद्योग को नुकसान न हो। यह भारत की नीति रही है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में अपने हितों को सर्वोपरि रखे।

ट्रंप की इंडोनेशिया जैसी डील की पेशकश पर भारत का जवाब

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के सामने वैसी ही डील का प्रस्ताव रखा है जैसी उन्होंने हाल ही में इंडोनेशिया के साथ की है। उस डील में इंडोनेशिया ने अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार खोल दिया है और बदले में अमेरिका ने इंडोनेशियाई उत्पादों पर भारी ड्यूटी लगाई है। भारत ने इस तरह के असंतुलित प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया है। भारत का रुख स्पष्ट है कि वह ऐसा समझौता तभी करेगा जब दोनों देशों के बीच पारस्परिक संतुलन हो।

India-US Trade Agreement: अमेरिका को नहीं दी छूट, भारत ने अपनी शर्तों पर कसा शिकंजा! अब भारत बनेगा निर्यातक

भारत ने अमेरिका की मांगों को ठुकराया

वॉशिंगटन में भारत और अमेरिका के बीच पांचवें दौर की व्यापार वार्ता चल रही है। भारत ने अमेरिका की उन मांगों को ठुकरा दिया है जिनमें डेयरी और कृषि उत्पादों पर ड्यूटी में छूट की बात की गई थी। भारत का कहना है कि उसने अब तक किसी भी FTA में डेयरी सेक्टर को ड्यूटी छूट नहीं दी है। इसके उलट भारत ने अमेरिका से स्टील और एल्यूमिनियम पर लगने वाली 50% ड्यूटी और ऑटो सेक्टर पर 25% टैक्स में राहत मांगी है।

 महंगाई नियंत्रण की नीति को बताया संतुलित

एस महेंद्र देव ने मौजूदा महंगाई नियंत्रण नीति को संतुलित और प्रभावी बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों में यह नीति सफल रही है क्योंकि महंगाई दर 2% से 6% के दायरे में रही जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को राहत मिली। उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के लिए 2024 को नया बेस ईयर बनाया जाएगा जिससे आंकड़े और अधिक सटीक होंगे।

मोबाइल क्षेत्र और राजकोषीय अनुशासन में बड़ी प्रगति

महेंद्र देव ने बताया कि भारत ने मोबाइल फोन सेक्टर में जबरदस्त प्रगति की है। 2015 में जहां मोबाइल आयात 78% था वहीं 2023 में यह घटकर 4% रह गया। साथ ही एफडीआई में भी इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में तेजी आई है। उन्होंने सरकार की राजकोषीय अनुशासन की तारीफ करते हुए बताया कि फिस्कल डेफिसिट 2021 में 9.2% था जो 2025 तक 4.8% हो गया है और सरकार का लक्ष्य 2026 तक इसे 4.4% तक लाना है।

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