MP Cabinet Meeting: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। जिसमें कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। साथ ही, मुख्यमंत्री ने उर्वरक प्रभारी मंत्रियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर उर्वरक मिले। साथ ही, नकली उर्वरकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
शोभायात्रा ‘लोक नृत्य’ की थीम पर आयोजित
इस बार बाबा महाकाल की शोभायात्रा ‘लोक नृत्य’ की थीम पर आयोजित की गई, जिसमें गुजरात के आदिवासी नृत्यों की विशेष प्रस्तुति हुई। श्रावण भादो में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही, विक्रम विश्वविद्यालय का नाम बदलकर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय करने के लिए विधानसभा में विधेयक लाया जाएगा।
MP में बनेगा विश्वस्तरीय डेटा सेंटर
मध्य प्रदेश में एक विश्वस्तरीय डेटा सेंटर बनाया जाएगा। मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर बनाने की भी मंजूरी मिल गई है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए गए अनुपूरक बजट और वित्त विधेयक पर चर्चा हो चुकी है।
फैसलों पर एक नज़र
- सावन में महाकाल की सवारी में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। प्रशासन की बेहतर व्यवस्थाओं की सराहना की गई और भविष्य में महाकाल यात्रा को देश भर में एक प्रतिष्ठित धार्मिक आयोजन बनाने का संकल्प लिया गया।
- मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों और प्रशासन को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि बुवाई के दौरान किसानों को उर्वरकों की किसी भी प्रकार की कमी या कालाबाजारी का सामना न करना पड़े और उन्हें समय पर अच्छी गुणवत्ता वाली उर्वरक उपलब्ध हो।
- मध्य प्रदेश में जैव विविधता को बढ़ावा देने, बाघ संरक्षण और पचमढ़ी क्षेत्र को बायोस्फीयर रिजर्व घोषित करने पर ज़ोर दिया गया है। इन क्षेत्रों में पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाए जाएँगे।
- उज्जैन और ग्वालियर में आयोजित होने वाले मेलों (विक्रमोत्सव वाणिज्य मेला, राजमाता सिंधिया मेला) के लिए ऑटोमोबाइल पर 50% कर छूट को मंजूरी दी गई है।
- राज्य में एक विश्वसनीय आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा। यह डेटा सेंटर देश के सर्वश्रेष्ठ डेटा सेंटरों में से एक होगा।
- 1960 में स्थापित गांधी सागर जलविद्युत केंद्र और मेवाड़ स्थित राणा प्रताप जलविद्युत केंद्र का संयुक्त रूप से जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया गया। इस परियोजना पर कुल 1037 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें से 30% योगदान सरकार का होगा।







