Malegaon Blast Case में बड़ा फैसला! 17 साल बाद मालेगांव धमाकों के आरोपी बरी, कोर्ट ने दी क्लीन चिट

By: MPLive Team

On: Thursday, July 31, 2025 11:43 AM

Malegaon Blast Case में बड़ा फैसला! 17 साल बाद मालेगांव धमाकों के आरोपी बरी, कोर्ट ने दी क्लीन चिट
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Malegaon Blast Case: महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए धमाके के मामले में आज मुंबई की एनआईए स्पेशल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। इस विस्फोट में 6 लोगों की जान गई थी और लगभग 100 लोग घायल हुए थे। अदालत ने इस केस में आरोपित सभी 7 लोगों को बरी कर दिया है। इनमें बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय, अजय रहीरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी शामिल हैं।

कोर्ट ने कहा- सरकार आरोप साबित नहीं कर पाई

स्पेशल जज एके लाहोटी ने अपने फैसले में कहा कि सरकार यह साबित नहीं कर पाई कि विस्फोटक मोटरसाइकिल में रखा गया था। कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि आरडीएक्स कहां से आया और कैसे लाया गया। घटना के समय पत्थर जब्त नहीं किए गए, फिंगरप्रिंट नहीं लिए गए और जो सबूत इकट्ठा किए गए, वे संदिग्ध हो सकते हैं। चेसिस नंबर भी पूरी तरह साफ नहीं किया गया और न ही मोटरसाइकिल को ठीक से बहाल किया गया।

Malegaon Blast Case में बड़ा फैसला! 17 साल बाद मालेगांव धमाकों के आरोपी बरी, कोर्ट ने दी क्लीन चिट

साध्वी प्रज्ञा के पास बाइक होने का सबूत नहीं

कोर्ट ने यह भी माना कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर उस मोटरसाइकिल की मालकिन थीं, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि घटना के समय वह बाइक उनके पास ही थी। इसी तरह, अभियोजन पक्ष यह भी साबित नहीं कर पाया कि कोई साजिश की बैठक हुई थी या उसमें आरोपी शामिल थे। अभियोजन द्वारा पेश किए गए 323 गवाहों में से करीब 40 गवाह अपने बयान से पलट गए।

कांग्रेस सरकार पर भी लगे थे गंभीर आरोप

इस केस के समय महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार थी। आरोप लगे थे कि एटीएस ने दबाव डालकर झूठे बयान दर्ज करवाए। बचाव पक्ष का कहना है कि पूरे मामले की जांच राजनीति से प्रेरित थी और पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध रही। वहीं, पीड़ित पक्ष के वकील का कहना है कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि न्याय मिलेगा। लेकिन आज अदालत ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

आरोपियों को राहत, एनआईए को झटका

इस फैसले के साथ ही एनआईए और राज्य एटीएस की जांच पर सवाल खड़े हो गए हैं। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में असफल रहा कि ब्लास्ट के लिए जिम्मेदार कौन था और कैसे ब्लास्ट को अंजाम दिया गया। कोर्ट के अनुसार, किसी भी धर्म में आतंकवाद की इजाजत नहीं होती और

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