कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने अपने भाई और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने साफ कहा कि “सच्चा भारतीय कौन है, यह सुप्रीम कोर्ट तय नहीं कर सकता।” उनका यह बयान उस वक्त आया जब सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि “अगर आप सच्चे भारतीय हैं तो ऐसा नहीं कहेंगे।” प्रियंका ने कहा कि राहुल का काम सरकार से सवाल करना है और वो यह कर्तव्य निभा रहे हैं।
सेना पर टिप्पणी का गलत मतलब निकाला गया: प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने कभी भी सेना के खिलाफ कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा, “मेरे भाई को सेना के प्रति गहरा सम्मान है और उनका बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।” प्रियंका ने इस मुद्दे को राजनीतिक मोड़ देने की कोशिशों की आलोचना की और कहा कि यह विपक्ष की आवाज को दबाने की साजिश है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर कांग्रेस का विरोध
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राहुल गांधी से पूछा कि वे अपने विचार संसद में क्यों नहीं रखते और सोशल मीडिया पर क्यों व्यक्त करते हैं। साथ ही उनसे यह भी पूछा गया कि क्या उनके पास चीन द्वारा कब्जा किए गए 2000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का कोई सबूत है? वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में राहुल की तरफ से पक्ष रखते हुए कहा कि विपक्षी नेता का काम सरकार से सवाल पूछना है और अगर प्रेस में छपी खबरों पर भी टिप्पणी नहीं कर सकते तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा।
राहुल गांधी पर मुकदमे पर रोक, पर सवाल उठते रहे
सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी है, लेकिन ‘सच्चा भारतीय’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर न्यायालय ने विपक्ष की भूमिका पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सिंघवी ने तर्क दिया कि अगर कोई भारत के क्षेत्रीय नुकसान पर चिंता जताता है, तो वह भी एक सच्चे भारतीय की पहचान हो सकती है। उन्होंने माना कि बयान को बेहतर तरीके से दिया जा सकता था, लेकिन शिकायतकर्ता का मकसद केवल राहुल को परेशान करना है।
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका जरूरी: प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी ने अपने बयान में दो टूक कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद अहम होती है। अगर विपक्ष सवाल नहीं उठाएगा तो लोकतंत्र अधूरा रह जाएगा। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी की जिम्मेदारी है कि वे जनता की ओर से सरकार से जवाब मांगें और यही वे कर रहे हैं।” उन्होंने कोर्ट से अपील की कि वह ऐसे बयानों को व्यक्तिगत हमला न माने, बल्कि इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा समझे।







