इंदौर में सड़क पर गुटखा थूकने के विवाद में ढाबा संचालक की दिनदहाड़े चाकू मारकर हत्या

By: MPLive Team

On: Tuesday, August 12, 2025 9:31 AM

इंदौर में सड़क पर गुटखा थूकने के विवाद में ढाबा संचालक की दिनदहाड़े चाकू मारकर हत्या
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भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक मामूली विवाद ने 25 वर्षीय ढाबा संचालक की जान ले ली। मामला विजय नगर थाना क्षेत्र का है, जहां सड़क पर गुटखा थूकने को लेकर हुए झगड़े में युवक को चाकू मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। इस घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और घटना की जांच जारी है।

कैसे हुआ पूरा विवाद?

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान लेखराज (25 वर्ष) के रूप में हुई है, जो इंदौर में ढाबा चलाता था। रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात वह अपना ढाबा बंद कर दो साथियों के साथ घर लौट रहा था। इसी दौरान एक मोटरसाइकिल पर सवार आरोपियों में से एक ने सड़क पर गुटखा थूक दिया। लेखराज ने इसका विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गया और आरोपियों में से एक ने चाकू से लेखराज पर हमला कर दिया।

इंदौर में सड़क पर गुटखा थूकने के विवाद में ढाबा संचालक की दिनदहाड़े चाकू मारकर हत्या

चाकू के वार से हुई दर्दनाक मौत

हमले में लेखराज गंभीर रूप से घायल हो गया और मौके पर ही काफी खून बह गया। उसके साथी और आसपास मौजूद लोग उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। इस बीच, इलाके में गश्त कर रही पुलिस टीम को घटना की जानकारी मिली और वह तुरंत मौके पर पहुंची। तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुके थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।

पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई, तीन आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद छापेमारी कर राज अहिरवार (19 वर्ष), पवन रजक (20 वर्ष) और जगदीश सिसोदिया (33 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उनके पास से वारदात में इस्तेमाल चाकू और मोटरसाइकिल बरामद की है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वारदात में और कोई शामिल था या नहीं। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि छोटी-सी बहस भी किस तरह बड़ी हिंसा में बदल सकती है और किसी की जान ले सकती है।

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