FASTag Annual Pass: निजी वाहनों के लिए टोल की नई सुविधा

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FASTag Annual Pass: शुक्रवार को 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, केंद्र सरकार ने निजी वाहनों के लिए फास्टैग-आधारित वार्षिक टोल पास लॉन्च किया। इस FASTag Annual Pass की कीमत 3,000 रुपये है। कार, जीप और वैन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संचालित टोल प्लाजा पर इस सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। यह पास एक वर्ष की सक्रियता या 200 टोल ट्रिप, जो भी पहले हो, के लिए वैध है। सीमा पूरी होने के बाद, फास्टैग स्वचालित रूप से मानक भुगतान-प्रति-ट्रिप मोड में बदल जाता है।

टोल प्रणाली कैसी है?

स्थान-आधारित टोल प्लाजा के लिए, प्रत्येक एक-तरफ़ा क्रॉसिंग को एक ट्रिप और वापसी में दो ट्रिप माना जाता है। बंद और टिकट प्रणाली में, प्रवेश से निकास तक की पूरी यात्रा को एक ट्रिप माना जाता है।

यह कहाँ मान्य होगा?

यह NHAI और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर मान्य है। राज्य राजमार्गों पर स्थित टोल प्लाज़ा तब तक टोल मुक्त रहेंगे जब तक उन्हें केंद्रीय फास्टैग प्रणाली से एकीकृत नहीं किया जाता।

FASTag Annual Pass खरीदने के लिए, वाहन मालिकों के पास विंडस्क्रीन पर लगा एक एक्टिव फास्टैग होना चाहिए, जो उनके पंजीकरण नंबर से जुड़ा हो।

FASTag Annual Pass खरीदते समय उन्हें ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा सकता। नए वाहनों के लिए विशेष रूप से जारी किए गए कुछ फास्टैग केवल वाहन चेसिस नंबर से ही पंजीकृत किए जा सकते हैं। ऐसे फास्टैग पर वार्षिक पास सक्रिय नहीं किए जा सकते और उन्हें पूरा वाहन पंजीकरण नंबर शामिल करने के लिए अपडेट करना होगा।

कहां से खरीद सकते है Annual Pass?

FASTag Annual Pass हाईवे यात्रा मोबाइल ऐप, NHAI या सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट, या किसी अधिकृत फास्टैग जारीकर्ता पोर्टल के माध्यम से खरीदा जा सकता है।

FASTag Annual Pass का भुगतान (3,000 रुपये) UPI, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, या नेट बैंकिंग के माध्यम से किया जा सकता है। इसके लिए फास्टैग वॉलेट बैलेंस का उपयोग नहीं किया जा सकता। एक्टिवेशन आमतौर पर दो घंटे के भीतर पूरा हो जाता है और एसएमएस के माध्यम से इसकी पुष्टि की जाती है।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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