अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और कई यूरोपीय नेताओं के साथ अहम बैठक की। इस बैठक ने संकेत दिए कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ज़ेलेंस्की संभवतः शांति सम्मेलन के लिए तैयार हैं। अमेरिकी सरकार यूक्रेन की लंबी अवधि की सुरक्षा गारंटी पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। इस दौरान ट्रंप ने अनजाने में एक जानकारी सबके सामने रख दी, जो पुतिन की योजना को दुनिया के सामने लाकर रख दिया।
माइक चालू होने से खुला राज़
बैठक से पहले ट्रंप की बातचीत अनजाने में सभी ने सुन ली। इसका कारण था कि उनका माइक चालू था। ट्रंप फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से कहते सुनाई दिए, “मुझे लगता है वह (रूसी राष्ट्रपति पुतिन) एक समझौता करना चाहते हैं। मुझे लगता है कि वह मेरे लिए समझौता करना चाहते हैं, समझ रहे हो? कितना पागलपन लगता है।” यह बयान अमेरिका के राष्ट्रपति की यह धारणा दिखाता है कि पुतिन सौदा करने के लिए तैयार हैं।
‘I think he wants to make a deal, you understand? As crazy as it sounds’
Trump caught talking on hot mic BEFORE ‘official’ meeting with European leaders pic.twitter.com/rA3AoiMz8V
— RT (@RT_com) August 18, 2025
बैठक में कौन-कौन शामिल थे
इस बैठक में ज़ेलेंस्की के अलावा फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रिडरिक मर्ज़, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब, NATO चीफ मार्क रूटे और यूरोपीय संघ प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयन शामिल थे। इस तरह की बैठक ने शांति वार्ता में नए संकेत दिए।
पुतिन से मुलाकात के बाद ट्रंप का बड़ा बयान
इसके अलावा, ट्रंप ने अलास्का में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के बाद भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका सीधे शांति समझौता करना है, न कि केवल युद्धविराम समझौते तक सीमित रहना। पहले ट्रंप केवल युद्धविराम की बात कर रहे थे, लेकिन अब उन्होंने सीधे शांति समझौते पर जोर देना शुरू कर दिया।
शांति की नई दिशा की उम्मीद
ट्रंप के इस माइक मोमेंट और बाद के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया कि शांति प्रक्रिया में नई गति आ सकती है। दुनिया के नजरिए से यह घटना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रूसी नेतृत्व की मंशा को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब भविष्य में यूरोप और अमेरिका की भूमिका और भी अहम हो जाएगी।







