जलगंगा अभियान बना सरकारी खजाने की लूट का ज़रिया, 1 घंटे की चौपाल में सूखे मेवे का बिल लाखों का

By: MPLive Team

On: Friday, August 29, 2025 5:20 PM

जलगंगा अभियान बना सरकारी खजाने की लूट का ज़रिया, 1 घंटे की चौपाल में सूखे मेवे का बिल लाखों का
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मध्य प्रदेश के शहडोल ज़िले में भ्रष्टाचार के नए-नए मामले रोज़ सामने आ रहे हैं। स्थिति यह है कि ज़िम्मेदार अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि सरकारी पैसों को विकास कार्यों में लगाने के बजाय उसे हेराफेरी का ज़रिया बना चुके हैं। हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहाँ 4 लीटर पेंट से काम दिखाकर 168 मज़दूरों और 68 राजमिस्त्रियों का बिल 1.7 लाख रुपये पास कर दिया गया। इतना ही नहीं, जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत आयोजित एक घंटे की चौपाल में 14 किलो सूखे मेवे, 6 लीटर दूध और 5 किलो चीनी का बिल बनाकर सरकारी खजाने को खुला लूटा गया।

दो पन्नों की फोटोकॉपी का 4000 रुपये का बिल

इन घोटालों के बीच अब जयसिंहनगर जनपद पंचायत के कुड़री ग्राम पंचायत से एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ दो पन्नों की फोटोकॉपी का बिल 4000 रुपये में पास किया गया। आमतौर पर एक पेज की फोटोकॉपी 1 से 2 रुपये में हो जाती है, लेकिन पंचायत सचिव और सरपंच की मिलीभगत से इसे 2000 रुपये प्रति पेज दिखाकर भुगतान कर दिया गया। यह बिल राज फोटो कॉपी सेंटर और डिजिटल स्टूडियो, जयसिंहनगर के नाम से बना है। सोशल मीडिया पर जैसे ही यह बिल वायरल हुआ, लोग पंचायत व्यवस्था की बेतहाशा भ्रष्टाचार की कहानियों पर हैरानी जता रहे हैं।

जलगंगा अभियान बना सरकारी खजाने की लूट का ज़रिया, 1 घंटे की चौपाल में सूखे मेवे का बिल लाखों का

भाटिया पंचायत का बिल भी चर्चा में

कुड़री पंचायत ही नहीं, बल्कि भाटिया ग्राम पंचायत का बिल भी इन दिनों चर्चा का विषय है। यहाँ 25,000 ईंटों का दाम ₹5 प्रति ईंट दिखाकर ₹1.25 लाख का बिल तैयार किया गया है। जबकि बाज़ार में ईंट की वास्तविक क़ीमत इससे कहीं अधिक है। यह मामला साफ़ तौर पर यह दर्शाता है कि पंचायत स्तर पर योजनाओं और निर्माण कार्यों के नाम पर किस तरह से सरकारी पैसों की लूट की जा रही है।

प्रशासन ने कहा – जांच होगी

लगातार उजागर हो रहे घोटालों पर ज़िला प्रशासन भी कठघरे में खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले पर शहडोल कलेक्टर केदार सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि बिल बनाने में गलती हुई है। उनके अनुसार, फोटोकॉपी का रेट ₹2 प्रति पेज है और वास्तव में 2000 पेज की कॉपी की गई थी। कलेक्टर ने बताया कि मामले की जांच के लिए एसडीएम को आदेश दिए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर हर दूसरे दिन ऐसे घोटाले सामने आते रहेंगे, तो क्या सच में ज़िला प्रशासन इन पर लगाम लगा पाएगा? ज़मीनी स्तर पर फैला यह भ्रष्टाचार न सिर्फ गांवों के विकास कार्यों को रोक रहा है, बल्कि लोगों का सरकार और व्यवस्था से भरोसा भी तोड़ रहा है।

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