वरिष्ठ बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चाचा कहा

By: MPLive Team

On: Sunday, August 31, 2025 2:19 PM

वरिष्ठ बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चाचा कहा
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वरिष्ठ भाजपा नेता और मध्य प्रदेश के शहरी विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘फूफा’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप, जो भारत पर टैरिफ लगा कर धमकी दे रहे हैं, वही हमारा फूफा है। इसके साथ ही विजयवर्गीय ने युवाओं से अपील की कि वे मैकडॉनल्ड्स और पिज़्ज़ा हट का बहिष्कार करें ताकि अमेरिका को सबक सिखाया जा सके। इसके अलावा उन्होंने युवाओं से कहा कि वे स्वदेशी भोजन की ओर बढ़ें और विदेशी भोजन की आदतों से दूरी बनाएं।

युवाओं से मैकडॉनल्ड्स और पिज़्ज़ा हट का बहिष्कार

इंदौर में एक स्थानीय स्कूल में आयोजित युवाओं की संसद में बोलते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि फूफा ट्रंप हमें टैरिफ लगा कर धमकी देते हैं। जब भी हमें कुछ खाने का मन होता है, हम मैकडॉनल्ड्स में बैठते हैं और अच्छा महसूस करते हैं। लेकिन अब हमें अपनी पसंद बदलनी होगी। उन्होंने बताया कि भारत की युवा आबादी अमेरिका की कुल आबादी के बराबर है। यदि भारतीय युवाओं ने ठान लिया, तो पिज़्ज़ा और बर्गर का बहिष्कार करके स्थानीय भोजन अपनाना आवश्यक हो जाएगा और अमेरिका को यह संदेश जाएगा कि हम स्वदेशी भोजन को प्राथमिकता देते हैं।

वरिष्ठ बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चाचा कहा

स्थानीय भोजन को अपनाने की अपील

विजयवर्गीय ने आगे कहा कि पिज़्ज़ा-बर्गर खाने के बजाय हम इंदौर के राऊ क्षेत्र की बड़ी समोसों और पोहा खा सकते हैं। क्यों जाएँ स्टारबक्स? क्यों न पrafुल भाई की चाय पी जाए? सबवे सैंडविच खाने की क्या जरूरत है? उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्थानीय भोजन को अपनाएं और अमेरिकी फास्ट फूड के प्रभाव को कम करें। उनका कहना था कि देश के युवा, यदि संगठित हों, तो सफेद बालों वाले फूफा ट्रंप को हराने की शक्ति रखते हैं। यही भारत की असली ताकत है।

आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी भोजन का महत्व

विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर का पिज़्ज़ा भी अलग है। यहां पिज़्ज़ा में सेव तक डाला जाता है, जो मैकडॉनल्ड्स में नहीं मिलेगा। उन्होंने युवाओं से कहा कि स्वदेशी खाओ, स्वदेशी अपनाओ। आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है। भारतीय युवाओं में दुनिया बदलने की शक्ति है। अगर हम अपने भोजन, अपने वस्त्र, अपने धार्मिक ग्रंथ और अपनी मिट्टी से प्यार करना सीख लें, तो हम पूरी दुनिया को बदलने की क्षमता रखते हैं। उनका संदेश था कि स्थानीय संसाधनों और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाना ही सच्ची शक्ति और स्वतंत्रता का मार्ग है।

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