भारत सरकार का नया वाहन टैक्स स्ट्रक्चर: लग्जरी कारें सस्ती, छोटी कारें और बाइक होंगी किफायती

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GST Reforms: भारत सरकार ने वाहनों और दोपहिया वाहनों पर लगने वाले टैक्स ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था के बाद मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, मारुति स्विफ्ट, नेक्सन जैसी लग्जरी कारों और 350 सीसी तक की बाइक्स की कीमतों पर भी असर पड़ेगा। आइए जानें कि इसका फायदा किसे होगा और किसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

लग्जरी कारें होंगी सस्ती

सरकार ने 22 सितंबर, 2025 से लग्जरी कारों पर लगने वाले टैक्स ढांचे में बदलाव किया है। पहले इन पर 28% जीएसटी के साथ 17-22% सेस भी लगता था, जिससे कुल टैक्स 50% तक पहुँच जाता था। अब नए नियमों के अनुसार, केवल 40% जीएसटी लगेगा और सेस पूरी तरह से हटा लिया जाएगा।

उदाहरण के लिए, अगर एक मर्सिडीज की कीमत 1 करोड़ रुपये है, तो पहले उस पर लगभग 50 लाख रुपये का टैक्स लगता था। अब यह टैक्स लगभग 40 लाख रुपये तक सीमित हो सकता है। यानी लग्जरी कारें थोड़ी सस्ती होंगी, लेकिन कीमतों में कोई बड़ा अंतर नहीं आएगा।

छोटी कारें होंगी और सस्ती

सरकार ने मारुति ऑल्टो, स्विफ्ट और टाटा नेक्सन जैसी छोटी कारों को बड़ा फायदा दिया है। 1,200 सीसी तक की पेट्रोल कारों और 1,500 सीसी तक की डीजल कारों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है।

इस बदलाव से ग्राहकों को 60,000 रुपये तक की बचत हो सकती है। ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए कार खरीदना आसान हो जाएगा।

बाइक और व्यावसायिक वाहनों पर भी असर

इसका असर सिर्फ़ कारों पर ही नहीं, बल्कि बाइक और बड़े वाहनों पर भी पड़ेगा। होंडा शाइन और एक्टिवा जैसी 350 सीसी तक की बाइक अब सस्ती हो जाएँगी। वहीं, बस, ट्रक और एम्बुलेंस जैसे व्यावसायिक वाहन भी 18% जीएसटी स्लैब के दायरे में आ गए हैं। इससे परिवहन लागत कम होने की संभावना है, जो आम आदमी के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

ऑटो सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इस कदम से लग्जरी कारों की कीमतों पर ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, क्योंकि टैक्स स्लैब तो बढ़ गया है, लेकिन सेस हटा लिया गया है। हालांकि, छोटी कारों और दोपहिया वाहनों के खरीदारों को निश्चित रूप से राहत मिलेगी।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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