किसानों को मिलेगी 3 हजार रुपये मासिक पेंशन, जानें आवेदन प्रक्रिया!

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PM Kisan Maandhan Yojana: देश की एक बड़ी आबादी कृषक वर्ग से ताल्लुक रखती है। लेकिन आज भी देश का हर किसान आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं है। बढ़ती उम्र के साथ, खेत में मेहनत कम होती जाती है और आमदनी भी घटती जाती है। ऐसे समय में मदद की ज़रूरत होती है। इसी ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना शुरू की है।

इस योजना के तहत पात्र किसानों को मासिक पेंशन दी जाती है, ताकि बुढ़ापे में उनका जीवन बिना किसी बड़ी आर्थिक चिंता के चल सके। यह किसानों के लिए एक बेहद फायदेमंद और महत्वपूर्ण योजना है। जो खासतौर पर देश के छोटे और सीमांत किसानों के लिए बनाई गई है। इसमें कितनी पेंशन मिलती है और आवेदन प्रक्रिया क्या है। आइए आपको पूरी जानकारी देते हैं।

PM Kisan Maandhan Yojana: किसानों को कितनी पेंशन मिलती है?

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत, पात्र किसानों को 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद 3,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है। यानी उन्हें प्रति वर्ष 36,000 रुपये की एक निश्चित राशि दी जाती है। यह पेंशन किसानों की आजीविका में मदद करती है और बुढ़ापे में आर्थिक तंगी को कम करती है।

PM Kisan Maandhan Yojana: मात्र 55 रुपये से लेकर 200 रुपये तक का मासिक प्रीमियम

आपको बता दें कि इस योजना से जुड़ने के लिए किसान को अपनी आयु और आयु सीमा से जुड़ी कुछ ज़रूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं। उसी के आधार पर उसकी पेंशन निर्धारित होती है। इसमें 55 रुपये से लेकर 200 रुपये तक का मासिक प्रीमियम जमा करना होता है।

PM Kisan Maandhan Yojana: आवेदन प्रक्रिया क्या है?

किसान मानधन योजना में आवेदन करने के लिए सबसे पहले किसान को अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक और आयु प्रमाण पत्र लेकर नज़दीकी कॉमन सर्विस सेंटर जाना होगा। यहाँ उसका आधार-आधारित पंजीकरण होता है। पंजीकरण के समय किसान को हर महीने एक निश्चित अंशदान राशि जमा करनी होती है।

जो उसकी उम्र पर निर्भर करता है। यानी योजना में जितनी जल्दी आवेदन किया जाएगा, प्रीमियम उतना ही कम होगा। आपको बता दें कि योजना में सरकार भी किसान के खाते में बराबर की राशि जमा करती है। इसके बाद 60 साल की उम्र से उसे हर महीने 3,000 रुपये पेंशन मिलने लगती है।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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