मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चल रहे मतभेदों के बीच, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दीग्विजय सिंह ने शुक्रवार (12 सितंबर) को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर साझा की। दीग्विजय सिंह ने लिखा कि उनका और कमलनाथ का परिवारिक और राजनीतिक रिश्ता लगभग 50 वर्षों पुराना है। उन्होंने आगे कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, जो स्वाभाविक हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कभी भी इनके बीच कोई गहरी दरार नहीं थी, केवल छोटे-मोटे मतभेद रहे हैं।
जनता के हित में कांग्रेस के नेतृत्व में सहयोग
दीग्विजय सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा कि दोनों नेताओं ने यह तय किया कि वे कांग्रेस के नेतृत्व में जनता के हित में मिलकर काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने हमेशा दोनों नेताओं को नेतृत्व के अवसर प्रदान किए हैं और जनता का प्यार भी हमेशा उनके साथ रहा है। यह मुलाकात मार्च 2020 में हुई राजनीतिक घटनाओं के पीछे छिपे संकेतों को भी उजागर करती है। उस समय कमलनाथ की कांग्रेस सरकार गिर गई थी और पार्टी के भीतर गहरी टकराहट हुई थी। दीग्विजय सिंह का यह पोस्ट यह संकेत देता है कि पार्टी पुराने विवादों को भुलाकर एक नई एकता का संदेश देना चाहती है।
‘विश लिस्ट’ और कांग्रेस सरकार का संकट
पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीग्विजय सिंह ने 23 अगस्त 2025 को MP Tak के एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में 2020 में कमलनाथ सरकार के पतन के असली कारणों का खुलासा किया। दीग्विजय ने कहा कि उन्हें और ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह आरोप लगाया गया कि सरकार उनके आपसी झगड़े के कारण गिरी, लेकिन यह पूरी तरह गलत था। दीग्विजय के अनुसार, उस समय कांग्रेस नेतृत्व पार्टी के भीतर चल रही टकराहट को सुलझाने की कोशिश कर रहा था। इसके लिए एक बैठक आयोजित की गई थी जो कि एक बड़े उद्योगपति के घर में हुई थी, जिसमें कमलनाथ और सिंधिया भी मौजूद थे। बैठक में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के विकास और वहां के विधायकों से जुड़े मुद्दों पर ‘विश लिस्ट’ तैयार की गई और इसे सरकार द्वारा लागू करने का वादा किया गया।
सिंधिया ने पार्टी से तोड़ा नाता
दीग्विजय सिंह के अनुसार, उस समय इन मांगों को गंभीरता से लागू नहीं किया गया, जिससे कांग्रेस सरकार के लिए संकट पैदा हुआ। 2018 में कांग्रेस सत्ता में आई और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने, लेकिन सिर्फ 15 महीनों के भीतर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से नाता तोड़कर भाजपा जॉइन कर लिया। इसके बाद कई कांग्रेस विधायक भी उनके साथ चले गए, जिससे कमलनाथ सरकार अल्पसंख्यक में आ गई और मार्च 2020 में सरकार गिर गई। इस घटना ने मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक असर डाला और अब दीग्विजय सिंह और कमलनाथ की हालिया मुलाकात पार्टी में नई एकता का संदेश देती है।







