देश की अग्रणी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली इस कंपनी की सहायक इकाई Flipkart India Private Limited का समेकित घाटा बढ़कर 5,189 करोड़ रुपये पहुंच गया है। जबकि पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 4,248.3 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। बिज़नेस इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Tofler द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, यह लगातार दूसरा साल है जब फ्लिपकार्ट की हानि में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आय में बढ़ोतरी लेकिन खर्च भी बढ़े
फ्लिपकार्ट की ऑपरेशनल आय वित्त वर्ष 2024-25 में 17.3 प्रतिशत बढ़कर 82,787.3 करोड़ रुपये हो गई। पिछले वित्त वर्ष में यह आय 70,541.9 करोड़ रुपये थी। हालांकि, आय में यह बढ़ोतरी कंपनी के लिए राहत नहीं ला सकी क्योंकि इसी अवधि में कंपनी का कुल व्यय 17.4 प्रतिशत बढ़कर 88,121.4 करोड़ रुपये पहुंच गया। वित्तीय लागत में भी बड़ा उछाल देखा गया, जो 57 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ लगभग 454 करोड़ रुपये हो गई। यानी, राजस्व में सुधार के बावजूद खर्च और वित्तीय बोझ के कारण कंपनी का घाटा और गहरा गया।

कंपनी की चुप्पी और विशेषज्ञों की राय
जब फ्लिपकार्ट से इन आंकड़ों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया मांगी गई तो कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ई-कॉमर्स क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा और लगातार जारी डिस्काउंट मॉडल पर खर्च ने फ्लिपकार्ट की वित्तीय स्थिति को कमजोर किया है। इसके बावजूद, आय और बिक्री में लगातार हो रही वृद्धि यह दर्शाती है कि फ्लिपकार्ट का मार्केट रीच और ग्राहक आधार तेजी से बढ़ रहा है। यानी, कंपनी की चुनौतियां बढ़ी हैं, लेकिन उसके व्यापारिक विस्तार के संकेत भी मजबूत हैं।
मिंत्रा ने दिखाई शानदार वृद्धि
इसी बीच, फ्लिपकार्ट की सहायक फैशन और लाइफस्टाइल ई-कॉमर्स कंपनी मिंत्रा डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड ने शानदार प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में मिंत्रा का समेकित लाभ बढ़कर 548.3 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में यह केवल 30.9 करोड़ रुपये था। यानी, कंपनी का मुनाफा कई गुना बढ़ा है। इतना ही नहीं, मिंत्रा की ऑपरेशनल आय भी 18 प्रतिशत बढ़कर 6,042.7 करोड़ रुपये हो गई, जो इससे पिछले वर्ष 5,121.8 करोड़ रुपये थी। यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि ई-कॉमर्स बाजार में जहां एक ओर फ्लिपकार्ट को नुकसान झेलना पड़ रहा है, वहीं मिंत्रा जैसी सहायक इकाई अपने क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन करते हुए लाभ कमा रही है।







