मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव रविवार (21 सितंबर) को उत्तर प्रदेश के वृंदावन पहुँचे, जहाँ उन्होंने एक धार्मिक कार्यक्रम में भाग लिया। यह आयोजन मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री राकेश शर्मा द्वारा आयोजित किया गया था, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और शहीदों की स्मृति को समर्पित था। इस अवसर पर सीएम ने भागवत कथा के समापन कार्यक्रम में शामिल होकर श्रद्धालुओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़े एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जो अब राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही संदर्भों में चर्चा का विषय बन गया है।
“राम लला मुस्कुराए तो कृष्ण कन्हैया भी मुस्कुराएँ”
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “हमने अयोध्या में राम लला को मुस्कुराते हुए देखा है। यह बदलते दौर का प्रतीक है। जब राम लला मुस्कुरा सकते हैं तो कृष्ण कन्हैया के मुस्कुराने में क्या बुराई है?” उनका यह बयान सीधे तौर पर मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जोड़ा जा रहा है। हालाँकि उन्होंने इस विवाद का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस कथन को श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा माना जा रहा है।

विपक्ष पर साधा निशाना – “कान और आँखें ठीक करो”
सीएम मोहन यादव ने अपने भाषण में विपक्ष पर भी अप्रत्यक्ष रूप से हमला बोला। उन्होंने कहा, “आवाज़ चारों ओर से आ रही है। जिनके कान खराब हैं, वे कान ठीक कर लें और जिनकी आँखों में समस्या है, वे साफ़ देख लें। हम दूर नहीं हैं।” उनके इस बयान को विरोधियों पर सीधा तंज माना जा रहा है। राम मंदिर के उद्घाटन के बाद लगातार मथुरा और काशी से जुड़े मुद्दों पर बीजेपी नेताओं की ओर से बयानबाज़ी होती रही है। ऐसे में मोहन यादव का यह बयान आगामी राजनीतिक रणनीति की ओर इशारा करता है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद और राजनीतिक संदर्भ
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद का मामला वर्तमान में इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद को हटाकर जन्मभूमि स्थल उन्हें सौंपा जाए, जबकि मुस्लिम पक्ष 1968 के समझौते और 1991 के पूजा स्थल अधिनियम का हवाला देते हुए अपने अधिकार को वैध ठहराता है। ऐसे में मोहन यादव का यह बयान केवल धार्मिक नहीं बल्कि गंभीर राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन के बाद अब भाजपा मथुरा मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री का “कृष्ण कन्हैया मुस्कुराएँ” वाला बयान इसी दिशा में एक अहम संकेत है।







