लद्दाख के सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई हाल ही में लद्दाख में हुई हिंसा के बाद हुई है। वांगचुक की गिरफ्तारी उस समय हुई जब वह दोपहर 2:30 बजे आयोजित होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले थे। लेह पुलिस द्वारा शुक्रवार को वांगचुक की गिरफ्तारी ने व्यापक आलोचना को जन्म दिया और चल रहे प्रदर्शनों को लेकर चिंता बढ़ा दी। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया है, लेकिन अभी तक उन्हें जेल में नहीं रखा गया है।
NGO का FCRA लाइसेंस रद्द
गिरफ्तारी से एक दिन पहले, गृह मंत्रालय ने वांगचुक के गैर-लाभकारी संगठन, Students Educational and Cultural Movement of Ladakh (SECMOL) का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था। इसका मतलब है कि अब यह संगठन विदेशी दान प्राप्त नहीं कर सकता। यह कदम लद्दाख में 24 सितंबर को हुई हिंसक घटनाओं के बाद उठाया गया। उस दिन प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों और BJP कार्यालय को आग के हवाले कर दिया। हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और 70 से अधिक लोग घायल हुए।

वांगचुक की प्रतिक्रिया
गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें लद्दाख की हालिया हिंसा के लिए दोषी ठहराए जाने पर वांगचुक ने इसे “बकरा बनाना” बताया। उन्होंने कहा कि यह वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश है। वांगचुक ने स्पष्ट किया कि वह कड़ी सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “वह यह आरोप लगाकर कि हिंसा मेरे या कांग्रेस पार्टी के कारण हुई, वास्तविक समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं। इससे कोई समाधान नहीं निकलेगा।”
वांगचुक ने समाचार एजेंसी PTI से कहा, “वे किसी को बकरा बनाने में चालाक हो सकते हैं, लेकिन बुद्धिमान नहीं हैं। इस समय हमें ‘चालाकी’ नहीं, बल्कि समझदारी की जरूरत है क्योंकि युवा पहले ही हताश हैं।” उन्होंने आगे कहा कि उन्हें PSA के तहत गिरफ्तार कर जेल में डालने की साजिश रची जा रही है और वह इसके लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें जेल में डालना समस्याओं को और बढ़ा सकता है।
हालात और बढ़ती चिंता
सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और SECMOL के FCRA लाइसेंस रद्द होने के बाद लद्दाख की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने कहा है कि युवा और पर्यावरण कार्यकर्ता असंतोष में हैं, और ऐसी कार्रवाईयों से सामाजिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कानून का पालन करते हुए समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए। लद्दाख की जटिल सामाजिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखना अब प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।







