PM Surya Ghar Yojana 2025: सोलर पैनल पर सब्सिडी, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी गाइडलाइन

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Surya Ghar Yojana भारत सरकार देश के लोगों के लिए विभिन्न योजनाएँ चलाती है। ये नीतियाँ विभिन्न आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। ऐसी ही एक योजना है सूर्य घर योजना, जिसके तहत लोगों को अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी मिलती है।

2024 में, भारत सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य घर बिजली योजना शुरू की, जिसके तहत लोगों को अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए सरकारी सब्सिडी मिलती है। इससे लागत कम करने और बिजली के बिलों में बचत करने में मदद मिलती है।

सूर्य घर योजना के लिए कितनी बड़ी छत होनी जरूरी?

इस योजना के तहत सोलर पैनल लगाने के लिए सबसे पहले छत के आकार को समझना ज़रूरी है। आमतौर पर, सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, 1 किलोवाट के सोलर पैनल के लिए कम से कम 100 वर्ग फुट जगह की आवश्यकता होती है। इसका मतलब है कि जितनी अधिक बिजली की आवश्यकता होगी, छत उतनी ही बड़ी होनी चाहिए। अगर कोई परिवार अपने घर में 2 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाना चाहता है, तो उसे लगभग 200 वर्ग फुट खाली जगह की आवश्यकता होगी। 1 किलोवाट के सिस्टम के लिए लगभग 300 वर्ग फुट जगह आवश्यक मानी जाती है। यह ज़रूरी है कि रूफटॉप सोलर पैनल को पर्याप्त धूप मिले।

ज़रूरत के हिसाब से सौर ऊर्जा प्रणाली चुनने की आज़ादी

इस योजना के तहत, सरकार ने हर परिवार को अपनी ज़रूरत के हिसाब से सौर ऊर्जा प्रणाली चुनने की आज़ादी दी है। ज़्यादा बिजली इस्तेमाल करने वाले परिवार बड़े पैनल लगवा सकते हैं, जबकि छोटे परिवार छोटे सिस्टम से काम चला सकते हैं।

सूर्य घर योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया 

सूर्य घर योजना में आवेदन करने के लिए पंजीकरण ज़रूरी है। इसके लिए आपको सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://pmsuryaghar.gov.in/ पर जाकर अपना DISCOM (बिजली वितरण) चुनना होगा। आवेदन करने के बाद, एक तकनीकी टीम साइट पर जाकर छत की नाप लेती है और मंज़ूरी देती है।

सौर पैनलों पर सब्सिडी भी दे रही सरकार

इस योजना के तहत सरकार सौर पैनलों पर सब्सिडी भी दे रही है। इससे लोगों की लागत काफ़ी कम हो जाती है। उदाहरण के लिए, 3 किलोवाट तक के सिस्टम पर 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिल सकती है। इससे आम आदमी को सौर पैनल लगवाने का लाभ आसानी से मिल जाता है।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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