Air India Dreamliner क्रैश केस में नया सस्पेंस, पायलट सुमित सभरवाल के पिता ने मांगी न्यायिक निगरानी वाली जांच

By: MPLive Team

On: Thursday, October 16, 2025 4:00 PM

Air India Dreamliner क्रैश केस में नया सस्पेंस, पायलट सुमित सभरवाल के पिता ने मांगी न्यायिक निगरानी वाली जांच
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पायलट सुमित सभरवाल के पिता पुष्कराज सभरवाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार की जांच रिपोर्ट भ्रामक और पक्षपातपूर्ण है और उनके बेटे को हादसे का गलत आरोप दिया गया है। पिता ने अब सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि इस विमान हादसे की नई न्यायिक निगरानी वाली जांच कराई जाए ताकि दोषपूर्ण रिपोर्ट के कारण पायलट की छवि को ठेस न पहुंचे।

हादसे का विवरण और आरोप

याचिका के अनुसार, 12 जून 2025 को एअर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर अहमदाबाद एयरपोर्ट से टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गया। इस हादसे में 229 यात्री, 12 क्रू मेंबर और जमीन पर 19 लोग मृत हुए। पुष्कराज सभरवाल ने याचिका में दावा किया है कि सरकार की जांच रिपोर्ट अधूरी और पक्षपातपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया कि हादसा पायलट की गलती के कारण हुआ, जबकि वास्तविकता में विमान में तकनीकी खराबी आई थी। हादसे के समय विमान का राम एयर टर्बाइन (RAT) अपने आप सक्रिय हो गया था, जो तब होता है जब विमान की इलेक्ट्रिकल या कंट्रोल सिस्टम फेल हो जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर सिस्टम में खराबी थी, तो पायलट को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है।

Air India Dreamliner क्रैश केस में नया सस्पेंस, पायलट सुमित सभरवाल के पिता ने मांगी न्यायिक निगरानी वाली जांच

तकनीकी पहलुओं और एफआईपी का समर्थन

पायलट संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने भी इस याचिका का समर्थन किया है। FIP का कहना है कि जांच रिपोर्ट में बोइंग 787 के सॉफ़्टवेयर सिस्टम (CCS) और इलेक्ट्रिकल फॉल्ट जैसे कई तकनीकी पहलुओं की अनदेखी की गई है। याचिका में यह भी कहा गया कि कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) की रिकॉर्डिंग मीडिया में लीक कर दी गई, जिससे गलत खबरें फैल गईं और पायलट की छवि को नुकसान पहुँचा। पिता ने बताया कि उनका बेटा एक ईमानदार और अनुभवी पायलट था, जिसने 15,000 घंटे बिना किसी गलती के उड़ान भरी, लेकिन अब उसे झूठे आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।

न्यायिक निगरानी में नई जांच की मांग

याचिका में कहा गया कि 30 अगस्त को जांच टीम के दो सदस्य बिना सूचना दिए उनके घर आए और दावा किया कि हादसा उनके बेटे की गलती से हुआ। पिता का कहना है कि यह सच्चाई छुपाने और जिम्मेदारी टालने का प्रयास है। इसलिए याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में नई जांच कराई जाए और रिपोर्ट में शामिल सभी सरकारी अधिकारियों को जांच से अलग किया जाए। पिता का यह भी कहना है कि केवल निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ही उनके बेटे के सम्मान और सच्चाई को बहाल कर सकती है।

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