सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई करने का फैसला किया है, जो केंद्र फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टमिक चेंज (CASC) द्वारा दायर की गई है। इस याचिका में केंद्र सरकार से ऑनलाइन जुआ और बेटिंग प्लेटफॉर्म्स को प्रतिबंधित करने का अनुरोध किया गया है, जो सोशल और ई-स्पोर्ट्स गेम्स के नाम पर काम कर रहे हैं।
याचिका में मांग की गई है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, तथा युवा मामले और खेल मंत्रालय ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम, 2025 की धारा और राज्यों द्वारा बनाए गए कानूनों की व्याख्या करके ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाएं। CASC का तर्क है कि सोशल और ई-स्पोर्ट्स गेम्स के नाम पर चल रहे जुआ और बेटिंग ऐप्स समाज और अर्थव्यवस्था पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।
याचिका में नामित प्रतिवादी और तर्क
याचिका में कुल छह प्रतिवादियों का नाम लिया गया है, जिसमें चार केंद्रीय मंत्रालय और प्रमुख ऐप स्टोर ऑपरेटर Apple Inc. और Google India Private Limited शामिल हैं। CASC की ओर से वकील विराग गुप्ता ने कोर्ट में तर्क रखा कि इन ऐप्स के माध्यम से बड़ी संख्या में युवा और आम जनता जुआ और बेटिंग में संलग्न हो रही है। पूर्व उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (DGP) विक्रम सिंह और शौर्य तिवारी ने याचिका में कोर्ट से आग्रह किया कि सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह इन ऐप्स की proliferation को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।

ऑनलाइन गेमिंग का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
याचिका में यह भी बताया गया है कि भारत की लगभग आधी आबादी ऑनलाइन गेमिंग में संलग्न है। इस गतिविधि का समाज और अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। युवा वर्ग में असामाजिक गतिविधियों, मानसिक दबाव और आर्थिक नुकसान के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। CASC का कहना है कि सरकार और संबंधित मंत्रालय इस स्थिति को गंभीरता से लें और कानून के दायरे में आते हुए ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाएं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और अपेक्षाएँ
सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका की सुनवाई 17 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवै और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच द्वारा होगी। कोर्ट से अपेक्षा की जा रही है कि वह याचिका पर गौर करते हुए केंद्रीय मंत्रालयों और ऐप स्टोर ऑपरेटरों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोर्ट ने इन प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाने का निर्देश दिया, तो यह ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग उद्योग में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है और समाज में फैली जुआ और अवैध बेटिंग की प्रवृत्ति को कम कर सकता है।







