शहडोल में पिता की गला घोंटकर हत्या, शक ने तोड़ दिए रिश्तों के सारे बंधन

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Shahdol Crime News: जब रिश्तों में भरोसा टूट जाता है, तो खून के रिश्ते भी बेरंग हो जाते हैं। शक एक पिता की जान ले लेता है और दो बेटों की ज़िंदगी को कैद कर देता है। यह दिल दहला देने वाली घटना शहडोल जिले के अमलाई थाना क्षेत्र के रामपुर में घटी। शक के चलते दोनों बेटों ने अपने पिता की गला दबाकर हत्या कर दी।

शक के चलते बेटों ने की पिता की हत्या 

जिले के अमलाई थाना क्षेत्र के रामपुर निवासी प्रेमलाल साहू की ज़मीन SECL ने ज़ब्त कर ली थी और उसे लाखों रुपये का मुआवज़ा मिला था। मुआवज़ा मिलने के बाद, वह अनूपपुर जिले के खांडा गाँव में अपने बड़े बेटे बबलू साहू के ससुराल आ गया और अपनी बहू और साली के साथ रहने लगा।

इससे बबलू को शक हुआ कि उसके पिता का उसकी सास के साथ अवैध संबंध है। उसकी पत्नी का लंबे समय से ससुराल से गायब रहना और अपने पिता पर शक ने बबलू के गुस्से को और बढ़ा दिया। आखिरकार उसने अपने छोटे भाई राजकर साहू के साथ मिलकर यह खौफनाक कदम उठा लिया।

बेरहमी से पीटा और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी

दोनों भाई खांडा आए और अपने पिता प्रेमलाल की बेरहमी से पिटाई की। जब स्थानीय लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो वे उसे रामपुर ले आए, जहाँ उन्होंने बेरहमी से पीटा और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के दौरान, बबलू ने अपनी पत्नी से फोन पर कहा, “देखो, तुम्हारी वजह से मैंने अपने पिता का गला घोंट दिया, अब वह अपनी आखिरी साँसें गिन रहे हैं।”

उसकी पत्नी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन दोनों ने एक न सुनी और अपने पिता की हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही अमलाई थाना प्रभारी जे.पी. शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने दोनों लड़कों को गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।

पिता-पुत्र के रिश्ते का सबसे दुखद उदाहरण

जिस पिता ने अपने बच्चों को बरगद की तरह छाया दी, उसे उसके ही बेटों ने मार डाला। अमलाई थाना क्षेत्र में हुई यह घटना सिर्फ़ एक हत्या नहीं, बल्कि पिता-पुत्र के रिश्ते का सबसे दुखद उदाहरण है। अमलाई थाना प्रभारी जे.पी. शर्मा ने बताया कि दोनों बेटों ने अपने पिता की गला घोंटकर हत्या कर दी, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और कार्रवाई की जा रही है।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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