मॉनसून 2025 की अनोखी कहानी: देश में जल्दी प्रवेश, देर से विदाई और असामान्य बारिश के कारण!

By: MPLive Team

On: Sunday, October 26, 2025 6:53 PM

मॉनसून 2025 की अनोखी कहानी: देश में जल्दी प्रवेश, देर से विदाई और असामान्य बारिश के कारण!
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भारत में मॉनसून इस वर्ष 24 मई को आया और 15 अक्टूबर को विदा हुआ। हालांकि, इसके बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों में अब भी वर्षा जारी है। इस बार मॉनसून सामान्य समय से एक दिन देरी से विदा हुआ, लेकिन वर्षा सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक रही। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 2025 में मॉनसून का आगमन भारत में सबसे जल्दी हुआ है, 2009 के बाद से यह सबसे त्वरित प्रवेश था। इस वर्ष मॉनसून ने पूरे देश को सामान्य तिथि 8 जुलाई से 9 दिन पहले ही कवर कर लिया, जो कि 2020 के बाद सबसे जल्दी था। सामान्य रूप से मॉनसून केरल में 1 जून से प्रवेश करता है और पूरे देश में 8 जुलाई तक फैल जाता है। यह उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर के आसपास पीछे हटना शुरू करता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

वर्षा की मात्रा और क्षेत्रीय अंतर

इस साल 30 सितंबर तक चार महीनों में भारत ने 937.2 मिमी वर्षा दर्ज की, जो सामान्य 868.6 मिमी से 8 प्रतिशत अधिक है। IMD के निदेशक जनरल मृत्युञ्जय मोहापात्रा ने कहा कि अधिकांश हिस्सों में अक्टूबर से दिसंबर तक पोस्ट-मॉनसून वर्षा सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। वहीं, पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत में इस साल केवल 1089.9 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य 1367.3 मिमी से 20 प्रतिशत कम है। मोहापात्रा ने बताया कि यह क्षेत्रीय वर्षा 1901 के बाद से दूसरी सबसे कम रही, जबकि सबसे कम वर्षा 2013 में दर्ज की गई थी। इसके विपरीत, उत्तर-पश्चिम भारत में 747.9 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से 27.3 प्रतिशत अधिक थी।

मॉनसून 2025 की अनोखी कहानी: देश में जल्दी प्रवेश, देर से विदाई और असामान्य बारिश के कारण!

पंजाब में बाढ़ और अतिरिक्त वर्षा के कारण

इस वर्ष पंजाब में अब तक की सबसे अधिक वर्षा दर्ज हुई, जो 2001 के बाद का उच्चतम रिकॉर्ड है और 1901 के बाद छठी सबसे अधिक है। जून, अगस्त और सितंबर में राज्य के सभी जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई, जिससे पंजाब में दशकों की सबसे भयंकर बाढ़ आई। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बादल फटना, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाएं हुईं, जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और लोग विस्थापित हुए। IMD के अनुसार, अतिरिक्त वर्षा का कारण सक्रिय मॉनसून और पश्चिमी विक्षोभों की बार-बार सक्रियता रही। मध्य भारत में 1125.3 मिमी और दक्षिणी प्रायद्वीप में 9.9 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। जून में 8.9%, जुलाई में 4.8%, अगस्त में 5.2% और सितंबर में 15.3% अधिक वर्षा दर्ज की गई।

आने वाले महीनों में मौसम और बारिश की संभावनाएँ

इस साल अक्टूबर के पहले सप्ताह में पहाड़ी राज्यों में पहली बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे दिल्ली समेत उत्तरी भारत में मौसम ठंडा हो गया। इस सर्दी में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे जा सकता है और यह दशक की सबसे ठंडी सर्दी हो सकती है। वहीं, बंगाल और तमिलनाडु में 28 से 31 अक्टूबर के बीच भारी वर्षा की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में गहरी अवसाद स्थिति बनी है, जो चक्रवात में बदल सकती है। इसका असर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और अन्य पूर्वी राज्यों में महसूस होगा। मध्य प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में भी वर्षा जारी रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार, विभिन्न कारणों से पूरे देश में दिसंबर तक अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना बनी रहेगी।

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