निवेशक सुरक्षा पर SEBI का जोर: IPO वैल्यूएशन पर और सख्त सुरक्षा उपायों की जरूरत – कमलेश वर्षने

By: MPLive Team

On: Friday, November 7, 2025 6:49 PM

निवेशक सुरक्षा पर SEBI का जोर: IPO वैल्यूएशन पर और सख्त सुरक्षा उपायों की जरूरत – कमलेश वर्षने
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भारतीय पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश वर्षने ने शुक्रवार को कहा कि आईपीओ (IPO) के मूल्यांकन को लेकर कोई नियामकीय कमी नहीं है, लेकिन खुदरा निवेशकों (Retail Investors) के हितों की रक्षा के लिए अधिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। उन्होंने यह बात कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर आयोजित 10वें संस्करण के सम्मेलन “Gatekeepers of Governance” में कही। वर्षने ने कहा कि बाजार नियामक का पूंजी बाजार के ऑफरिंग्स में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप से दूरी बनाना एक सही कदम है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि आईपीओ के मूल्यांकन निष्पक्ष, प्रभावी और पारदर्शी हों। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में आईपीओ की बढ़ती संख्या और उनके ऊँचे वैल्यूएशन को देखते हुए खुदरा निवेशकों को पर्याप्त जानकारी और सुरक्षा मिलना बेहद जरूरी है।

“वैल्यूएशन पर कोई कमी नहीं, पर सुधार की गुंजाइश है”

कमलेश वर्षने ने कहा, “मैं यह नहीं कह रहा कि नियामक स्तर पर कोई कमी है, लेकिन यह देखना जरूरी है कि जो वैल्यूएशन हो रहे हैं, वे सही हैं या नहीं। हाल ही में हमने देखा है कि कई आईपीओ ऐसे आए हैं, जिनके मूल्यांकन पर खुदरा निवेशकों ने सवाल उठाए हैं।” उन्होंने आगे कहा कि सेबी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कंपनियों द्वारा निर्धारित मूल्यांकन बाजार की वास्तविक स्थिति को दर्शाएं और छोटे निवेशकों को भ्रमित न करें। वर्षने के इस बयान से एक दिन पहले सेबी के चेयरमैन तुथिन कांता पांडे ने भी स्पष्ट किया था कि सेबी आईपीओ वैल्यूएशन में हस्तक्षेप नहीं करेगी। उन्होंने कहा था, “हम वैल्यूएशन तय नहीं करते, यह पूरी तरह निवेशकों पर निर्भर है कि वे उसे स्वीकार करते हैं या नहीं।”

लेंसकार्ट, नायका और पेटीएम के आईपीओ पर उठे सवाल

हाल ही में ₹7,200 करोड़ के लेंसकार्ट (Lenskart) आईपीओ की कीमतों को लेकर निवेशकों के बीच चिंता जताई गई थी। इससे पहले नायका (Nykaa) और पेटीएम (Paytm) जैसे हाई-प्रोफाइल आईपीओ के मूल्यांकन को लेकर भी कई हितधारकों और विश्लेषकों ने सवाल उठाए थे। कमलेश वर्षने ने कहा, “अब हमारा मानना है कि जब बड़े निवेशक मूल्यांकन करते हैं, तो उस प्रक्रिया से सेबी को दूरी बना लेनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार का हितों का टकराव न हो।” उन्होंने बताया कि कई बार प्रमोटर शेयरधारक (Promoter Shareholders) कॉर्पोरेट डील या पुनर्गठन के दौरान कृत्रिम रूप से ऊँचे मूल्यांकन तय करते हैं, जिससे छोटे या माइनॉरिटी शेयरधारकों को नुकसान उठाना पड़ता है।

भविष्य में नियामक सख्ती की संभावना

वर्षने ने कहा कि ऐसे मामलों में सेबी को भविष्य में अधिक सख्त नियामक कदम उठाने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कभी-कभी कॉर्पोरेट व्यवस्थाओं और मर्जर-अधिग्रहण सौदों के दौरान छोटे निवेशकों के हितों की अनदेखी होती है। इसलिए, सेबी का उद्देश्य अब यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे लेनदेन में मूल्यांकन पारदर्शी, उचित और निवेशकों के अनुकूल हो। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य बाजार को अत्यधिक नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि हर निवेशक—चाहे वह बड़ा हो या छोटा—समान अवसर और सुरक्षा प्राप्त करे।” सेबी के अनुसार, आने वाले समय में आईपीओ प्रक्रियाओं, मूल्यांकन मानकों और निवेशक शिक्षा अभियानों को और मजबूत किया जाएगा, ताकि खुदरा निवेशक अधिक जागरूक होकर निर्णय ले सकें और बाजार में भरोसा बनाए रखें।

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