बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान गुरुवार (6 नवंबर) को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया। इस चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर वोटिंग हुई, जिसमें पटना भी शामिल था। जेडीयू नेता अशोक चौधरी, उनकी पत्नी नीता चौधरी, और एलजेपी (राम विलास पासवान) की सांसद शंभवी चौधरी ने पटना के बुद्धा कॉलोनी स्थित सेंट पॉल्स स्कूल में बने मतदान केंद्र पर अपने वोट डाले। लेकिन मतदान के बाद शंभवी चौधरी द्वारा अपनी दोनों हाथों की उंगलियों पर स्याही दिखाने से नया विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और चुनाव आयोग से जांच की मांग की।
कांग्रेस और आरजेडी ने साधा निशाना, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
शुक्रवार (7 नवंबर) को कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर शंभवी चौधरी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “बिहार में एनडीए सांसद शंभवी चौधरी ने पहली बार दोनों हाथों पर स्याही लगवाई है। आखिर ये लोग चुनाव और लोकतंत्र को कितना और नुकसान पहुंचाएंगे?” सुप्रिया के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। वहीं, राजद प्रवक्ता कंचना यादव ने इंस्टाग्राम पर शंभवी का वीडियो साझा करते हुए लिखा, “यह तो फ्रॉड का एक अलग स्तर है। यह एलजेपी सांसद शंभवी चौधरी हैं, जिनकी दोनों उंगलियों पर स्याही लगी है। इसका मतलब उन्होंने दो बार वोट डाला। जब यह बात सामने आई, तो उनके पिता अशोक चौधरी उन्हें आंखों से इशारे कर रहे थे। चुनाव आयोग बताए कि यह कैसे हो रहा है? कौन करेगा इसकी जांच?”
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, जनता ने भी उठाए सवाल
शंभवी चौधरी का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूजर्स ने इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताया है। एक यूजर ने लिखा, “क्या शंभवी जी ने दो बार वोट दिया? कल कई भाजपा कार्यकर्ताओं को भी दो जगह वोट करते देखा गया था, लेकिन यह तो और भी चौंकाने वाला है — एक ही बूथ पर दोनों हाथों पर स्याही लगना! क्या यह चुनाव आयोग के संरक्षण में हो रहा है?” वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि संभव है स्याही गलती से लग गई हो या किसी प्रतीकात्मक कारण से उन्होंने ऐसा किया हो, लेकिन विपक्ष का कहना है कि ऐसा कदम चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
विपक्ष की जांच की मांग, आयोग की चुप्पी पर सवाल
कांग्रेस और आरजेडी दोनों ने चुनाव आयोग से तुरंत जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर कोई जनप्रतिनिधि इस तरह का कार्य करता है, तो यह न केवल चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है बल्कि लोकतंत्र के साथ धोखा है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की चुप्पी से जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है। फिलहाल, चुनाव आयोग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार, पटना जिला प्रशासन ने इस घटना के वीडियो की जांच शुरू कर दी है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला चाहे जो भी निकले, लेकिन इससे एक बार फिर ईमानदार और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की आवश्यकता पर बहस तेज हो गई है।







