सड़क हादसों पर SC का सख्त रुख: NHAI और ट्रांसपोर्ट मंत्रालय को तत्काल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

By: MPLive Team

On: Monday, November 10, 2025 4:22 PM

सड़क हादसों पर SC का सख्त रुख: NHAI और ट्रांसपोर्ट मंत्रालय को तत्काल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के फालोदी और आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में हुई गंभीर सड़क दुर्घटनाओं के मामलों को स्वतः संज्ञान में लिया है। इन दोनों दुर्घटनाओं में क्रमशः 18 और 19 लोगों की मौत हो गई। न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय विश्व्नोई की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और परिवहन मंत्रालय से रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि गड्डों और खराब सड़क रखरखाव के कारण ये दुर्घटनाएं हुई हैं, और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

सड़क की स्थिति खराब और टोल वसूली जारी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजमार्ग पर बिना अनुमति बनाए गए ढाबे भी बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। ट्रक इन ढाबों पर रुकते हैं और तेज़ रफ्तार वाहनों के लिए यह ट्रक दिखाई नहीं देते, जिससे मौतें हो जाती हैं। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सड़क की हालत बहुत खराब है, लेकिन टोल वसूली जारी है। गड्डों और खराब रखरखाव के कारण वाहन नियंत्रण खो देते हैं और दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति अस्वीकार्य है और तुरंत सुधार की जरूरत है।

NHAI और परिवहन मंत्रालय से रिपोर्ट तलब

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में NHAI और परिवहन मंत्रालय से रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने दोनों संस्थाओं से कहा है कि वे दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट जमा करें। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि फालोदी और श्रीकाकुलम में हुई दुर्घटनाओं वाले मार्गों पर कितने ढाबे बिना अनुमति के या राजमार्ग की जमीन पर बनाए गए हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी पूछा कि रखरखाव के दौरान ठेकेदारों ने किन नियमों का पालन किया और क्या मानक पूरे किए गए।

सड़क दुर्घटनाओं को तुरंत नियंत्रित करने की आवश्यकता

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजमार्गों पर होने वाली इन अनियमितताओं के कारण जीवन की हानि हो रही है। अदालत ने कहा कि यह स्थिति तुरंत नियंत्रित की जानी चाहिए। कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि सड़क की गुणवत्ता, गड्डों की मरम्मत, टोल वसूली, और बिना अनुमति बनाए गए ढाबों पर विशेष ध्यान दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि यदि सही तरीके से सुधार किया जाए तो इस प्रकार की दुर्घटनाओं में भारी कमी लाई जा सकती है और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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