शहडोल में अंधविश्वास की भेंट चढ़ी महिला: सिंचौरा गांव की दर्दनाक घटना से दहशत में ग्रामीण

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Shahdol News: शहडोल ज़िले के सिंचौरा गांव में अंधविश्वास ने एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर दिया। आधुनिक दौर में विज्ञान और जागरूकता की बढ़ती पहल के बावजूद, ग्रामीण इलाकों में फैल रहा अंधविश्वास अब भी कई जिंदगियों को निगल रहा है। सीधी थाना क्षेत्र में 50 वर्षीय राजवती गैंड की बेरहमी से हत्या इसी कड़ी का दर्दनाक उदाहरण है।

यह घटना 14 नवंबर की रात की है। राजवती अपने घर के कमरे में अकेली सो रही थी। इसी दौरान गांव के ही पप्पू सिंह गैंड ने अचानक कमरे में घुसकर सोती हुई राजवती पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। लगातार वार किए जाने से राजवती की मौके पर ही मौत हो गई। घटना से पूरे गांव में दहशत और गहरा आक्रोश फैल गया।

बेटी की मौत को जादू-टोना समझ बैठा आरोपी

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पप्पू की बड़ी बेटी सितंबर में हादसे में डूब गई थी। परिवार और ग्रामीणों ने इसे दुर्घटना माना, लेकिन पप्पू को शक था कि उसकी बेटी की मौत जादू-टोने की वजह से हुई है। अंधविश्वास के प्रभाव में उसने राजवती को इस मौत के लिए जिम्मेदार मान लिया और बदले की नीयत से उसकी जान ले ली।

घरवालों ने उसे ऐसा कदम न उठाने की चेतावनी भी दी थी, लेकिन गुस्से और भ्रम में डूबे पप्पू ने किसी की बात नहीं सुनी। हत्या के बाद वह अगले दिन अपने दो दोस्तों के साथ ढोले गांव में घूमता रहा, जबकि उन्हें इस वारदात की कोई जानकारी नहीं थी। बाद में वह गांव से फरार हो गया।

पुलिस जांच में अंधविश्वास की कड़ियां मजबूत

शहडोल के SP रामजी श्रीवास्तव ने बताया कि घटनास्थल से जुटाए गए सबूतों और प्रारंभिक जांच के आधार पर पप्पू सिंह इस हत्या का मुख्य संदिग्ध है। उसकी तलाश में टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। गिरफ्तारी के बाद घटना के और भी पहलू स्पष्ट हो सकेंगे।

जागरूकता की कमी का गंभीर सवाल

यह घटना एक बार फिर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच और जागरूकता की भारी कमी को उजागर करती है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के बावजूद अंधविश्वास जैसी कुरीतियां कई बार मासूमों की जान ले लेती हैं। राजवती की मौत सिर्फ एक हिंसक वारदात नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि जब तक लोगों में तर्कशील सोच नहीं विकसित होगी, तब तक ऐसी दर्दनाक घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा।

स्थानीय प्रशासन अब ग्रामीणों में वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में पहल करने की बात कह रहा है। वहीं, गांव के निवासियों ने भी इस घटना के बाद बच्चों और युवाओं को अंधविश्वास से दूर रखने के लिए सामुदायिक प्रयास की जरूरत बताई है।

राजवती की मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ा है, बल्कि समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आज भी अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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