Voter List Update के नाम पर बढ़ रहा OTP फ्रॉड, असली BLO की पहचान जानना ज़रूरी

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देशभर में वोटर लिस्ट अपडेट करने का अभियान जारी है, लेकिन इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर ठग लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। असली BLO (Booth Level Officer) घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं, वहीं कुछ धोखेबाज़ सरकारी कर्मचारी बनकर फोन कर OTP मांग रहे हैं। कई मामलों में लोगों के बैंक खाते कुछ ही सेकंड में खाली हो गए। ऐसे में सही जानकारी और सावधानी बेहद महत्वपूर्ण है।

क्या है SIR प्रोसेस?

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिफाइड रिपोर्टिंग, जिसके ज़रिए वोटर लिस्ट की जांच और सुधार किया जाता है। इस प्रक्रिया में BLO आपके घर आता है और एक फॉर्म में नाम, पता, जन्मतिथि, आधार नंबर और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी भरता है। अगर जरूरत हो तो आपकी फोटो भी ले सकता है।

इस पूरी प्रक्रिया में कभी भी OTP, लिंक या ऑनलाइन वेरिफिकेशन की मांग नहीं की जाती। सबकुछ ऑफलाइन और आपके सामने होता है।

असली BLO कैसे पहचाने?

  • असली BLO सिर्फ़ घर आकर फॉर्म भरता है।
  • कोई कॉल करके जानकारी या OTP नहीं मांगता।
  • न ही किसी लिंक पर क्लिक करने को कहेगा।
  • BLO के पास पहचान पत्र और ड्यूटी स्लिप होती है, जिसे आप देखकर सत्यापित कर सकते हैं।

अगर कोई आपको फोन पर वोटर कार्ड अपडेट की बात कहकर OTP मांगता है, तो वह निश्चित रूप से ठग है।

OTP स्कैम ऐसे दिया जाता है अंजाम

ठग पहले आपके नंबर पर कॉल करते हैं और कहते हैं कि आपका नाम वोटर लिस्ट से हट सकता है या तुरंत अपडेट की जरूरत है। वे आपको भ्रमित करके एक OTP भेजते हैं और उसे साझा करने को कहते हैं।
एक बार OTP बताने के बाद, वे आपके बैंक अकाउंट, UPI, Google Pay या PhonePe तक पहुंचकर पैसे निकाल लेते हैं। यह पूरा खेल कुछ ही पलों में हो जाता है।

अगर OTP मांगने वाली कॉल आए तो क्या करें?

  • तुरंत कॉल काट दें।
  • अपने इलाके के असली BLO या चुनाव कार्यालय में जानकारी लें।
  • किसी भी स्थिति में OTP या बैंक से जुड़ी जानकारी साझा न करें।

अगर गलती से OTP दे दिया है और पैसा कट गया है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

सावधानी ही बेहतर सुरक्षा

वोटर लिस्ट अपडेट का काम केवल आपके घर आने वाले BLO के ज़रिए ही मानें। फोन पर किसी अजनबी को OTP, आधार नंबर, मोबाइल नंबर या बैंक से जुड़ी जानकारी न दें।
अपने परिवार के बुज़ुर्गों को भी सावधान ज़रूर करें, क्योंकि वे ऐसे ठगी वाले कॉल का आसानी से शिकार बन जाते हैं।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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