सुकन्या समृद्धि योजना: 50,000 रुपये सालाना निवेश से बेटी को मिल सकते हैं 23 लाख, जानें पूरा कैलकुलेशन

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Sukanya Samriddhi Yojana: केंद्र सरकार बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए कई योजनाएं चलाती है, जिनमें सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana – SSY) सबसे लोकप्रिय है। वर्ष 2015 में शुरू की गई यह स्कीम 10 साल से कम उम्र की लड़कियों के लिए विशेष रूप से बनाई गई थी। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह सभी सरकारी बचत योजनाओं में सबसे ऊंचा ब्याज दर—8.2% प्रतिवर्ष—प्रदान करती है।

स्कीम की प्रमुख खासियतें

  • 10 साल से कम उम्र की लड़की के नाम पर ही अकाउंट खुलता है।
  • न्यूनतम जमा राशि ₹250 प्रति वर्ष।
  • अधिकतम निवेश सीमा ₹1.5 लाख प्रतिवर्ष।
  • निवेश अवधि: 15 वर्ष।
  • अकाउंट मैच्योरिटी: खोलने की तारीख से 21 वर्ष बाद।
  • बेटी की शादी 18+ होने पर अकाउंट समय से पहले बंद कराया जा सकता है।
  • इस स्कीम में परिवार अधिकतम दो बेटियों के लिए अकाउंट खोल सकता है (जुड़वां बेटियों के मामले में छूट)।

23 लाख रुपये कैसे बनते हैं? पूरा कैलकुलेशन

अगर आपकी बेटी अभी 1 साल की है और आप उसके नाम पर इस साल SSY अकाउंट खोलते हैं, तो आप 15 साल तक पैसे जमा कर सकते हैं।

यदि आप हर साल 50,000 रुपये जमा करते हैं, तो 8.2% की ब्याज दर पर 21 साल की मैच्योरिटी पर कुल राशि लगभग ₹23,09,193 हो जाती है।

यानी कुल निवेश:

  • 50,000 × 15 साल = ₹7,50,000

कुल मैच्योर रिटर्न:

  • लगभग ₹23 लाख, जिसमें ब्याज की कमाई सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।

यही वजह है कि सुकन्या समृद्धि योजना को बेटी की शिक्षा और शादी के लिए सबसे सुरक्षित एवं लाभकारी निवेश माना जाता है।

कहां खुलता है अकाउंट?

आप यह अकाउंट देश के किसी भी पोस्ट ऑफिस या अधिकांश सरकारी/निजी बैंकों में खोल सकते हैं।

दस्तावेज़:

  • बेटी का जन्म प्रमाण पत्र
  • माता-पिता का पहचान पत्र
  • पता प्रमाण
  • फोटो

क्यों है यह योजना सबसे खास?

इस योजना में मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री है और निवेश पर भी धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है।
साथ ही, यह योजना कम जोखिम वाली है क्योंकि इसे केंद्र सरकार की गारंटी प्राप्त है।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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