जिसने भी कभी हवाई जहाज से सफर किया होगा, उसने टर्बुलेंस का अनुभव जरूर किया होगा। अक्सर लोग सोचते हैं कि क्या हवाई जहाज हवा में किसी चीज से टकराता है, जिसके कारण यह टर्बुलेंस होता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। असल में टर्बुलेंस तब होता है जब हवाई जहाज के आसपास हवा का प्रवाह बाधित हो जाता है। वायुमंडल में हवा निरंतर चलती रहती है, कभी ऊपर उठती है और कभी नीचे गिरती है। जब हवाई जहाज इन अनियमित हवा के प्रवाहों में प्रवेश करता है, तो वह कुछ समय के लिए हिल सकता है या उछल सकता है। इसे ही टर्बुलेंस कहा जाता है। यह एक सामान्य प्राकृतिक घटना है, जिसे विमान और पायलट दोनों सुरक्षित तरीके से संभालते हैं।
मौसम और तूफानी बादलों का टर्बुलेंस पर असर
टर्बुलेंस की सबसे आम वजह मौसम होता है। खासतौर पर क्यूम्युलोनिम्बस जैसे तूफानी बादल जब उड़ान के रास्ते में आते हैं, तब हवा का प्रवाह बहुत अस्थिर हो जाता है। इन बादलों में ऊपर की ओर हवा (अपड्राफ्ट) और नीचे की ओर हवा (डाउनड्राफ्ट) तेजी से चलती है, जो हवाई जहाज को ऊपर-नीचे झटके दे सकती है। पायलट ऐसे बादलों से बचने की पूरी कोशिश करते हैं क्योंकि ये झटके काफी तेज हो सकते हैं। लेकिन कभी-कभी मौसम की वजह से टर्बुलेंस अनिवार्य हो जाता है। इसलिए पायलट यात्रियों को पहले से इस बारे में सूचित करते हैं ताकि वे अपने सीट बेल्ट बांध लें।
जेट स्ट्रीम और भौगोलिक प्रभाव से टर्बुलेंस
ऊपरी वायुमंडल में तेज़ गति से बहने वाली हवा की धाराओं को जेट स्ट्रीम कहते हैं। ये जेट स्ट्रीम्स हवाई जहाज के लिए कभी-कभी टर्बुलेंस का कारण बन जाती हैं। जब विमान तेज़ गति से बहने वाली हवा से धीमी गति वाली हवा की सीमा पार करता है, तो अचानक हवा की दिशा और गति में बदलाव होता है। इस वजह से विमान हिल सकता है और यात्रियों को झटका महसूस होता है। इसके अलावा, पहाड़ी इलाकों के ऊपर भी टर्बुलेंस हो सकता है। जब तेज हवाएं पहाड़ों से टकराती हैं, तो हवा ऊपर की ओर उठती है और नीचे लहराती है। यह हवा का पैटर्न विमान को अस्थिर कर देता है और झटके देता है।
क्या विमान को किसी ठोस वस्तु से टकराना पड़ता है?
हवाई जहाज आसमान में किसी ठोस वस्तु से टकराता नहीं है। टर्बुलेंस के दौरान विमान बस हवा के दबाव और अस्थिर हवा के प्रवाह से गुजरता है। हवाई जहाज को ऐसे टर्बुलेंस को झेलने के लिए खासतौर पर डिज़ाइन किया गया है ताकि वे सामान्य से कई गुना अधिक ताकतें सह सकें। इसके साथ ही पायलटों को भी टर्बुलेंस के दौरान विमान को सुरक्षित उड़ाने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। इसलिए यात्रियों को टर्बुलेंस के समय घबराने की जरूरत नहीं होती। बस सीट बेल्ट बांधकर सुरक्षित रहना ही सबसे अच्छा उपाय होता है।







