आज के समय में सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि स्मार्टवॉच, टैबलेट और लैपटॉप भी टचस्क्रीन तकनीक पर निर्भर हैं। तकनीक की प्रगति के साथ टचस्क्रीन अब पहले से ज्यादा स्मूद, तेज़ और यूजर फ्रेंडली हो गए हैं। मोबाइल फोन की बात करें तो स्क्रीन का साइज बढ़ने के साथ-साथ स्क्रीन के नीचे एक पतली काली लाइन भी आम हो गई है। कई लोग इसे सिर्फ डिजाइन का हिस्सा समझते हैं, लेकिन इसकी असली वजह इससे कहीं अलग है।
होम बटन से लेकर जेस्चर नेविगेशन तक का सफर
कुछ साल पहले तक मोबाइल फोन के नीचे एक फिजिकल होम बटन होता था, जिससे यूजर फोन को नियंत्रित करता था। जैसे-जैसे स्क्रीन का साइज बड़ा हुआ और बेज़ल्स पतले हुए, कंपनियों ने होम बटन हटाकर जेस्चर नेविगेशन सिस्टम अपनाना शुरू किया। यह जो काली लाइन स्क्रीन के नीचे दिखाई देती है, वह इस बदलाव का नतीजा है। विशेषज्ञ UI और UX डिज़ाइनर्स के अनुसार, यह लाइन आज लगभग हर आधुनिक स्मार्टफोन में पाई जाती है। यह फीचर पहले से आईफोन में था और अब लगभग सभी एंड्रॉइड फोन, खासकर गूगल और सैमसंग जैसे बड़े ब्रांड्स में भी देखने को मिलता है।
काली लाइन की असली भूमिका और उपयोग
आईफोन में यह लाइन सभी मॉडल्स में लगभग एक जैसी दिखती है, जबकि एंड्रॉइड फोन में इसका इस्तेमाल फोन के मॉडल और एंड्रॉइड वर्जन के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। लेकिन इसका मकसद दोनों प्लेटफॉर्म पर एक ही है। यह लाइन पुराने होम बटन का डिजिटल रूप है और फोन ऑपरेशन को सबसे आसान बना देती है। इस काली लाइन की मदद से आप बिना किसी फिजिकल बटन के फोन को नियंत्रित कर सकते हैं। अगर आप किसी ऐप में हैं और होम स्क्रीन पर वापस जाना चाहते हैं, तो बस नीचे से ऊपर की ओर स्वाइप करें। इसी लाइन से आप खुले हुए ऐप्स को मिनिमाइज़ कर सकते हैं या ऐप्स के बीच स्विच भी कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर आप व्हाट्सएप इस्तेमाल कर रहे थे और फिर फोटो ऐप खोला, तो आप इस लाइन पर बाएं या दाएं स्वाइप करके दोनों ऐप्स के बीच आसानी से स्विच कर सकते हैं।
जेस्चर नेविगेशन के फायदे और अंतर
इस लाइन को होम इंडिकेटर बार, जेस्चर बार या नेविगेशन बार भी कहा जाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब बटन दबाने की ज़रूरत नहीं रहती, पूरा फोन हल्के टच से नियंत्रित हो जाता है। अगर आप स्क्रीन के नीचे से ऊपर स्वाइप करके अपनी उंगली को थोड़ी देर के लिए रोकते हैं, तो आपके सामने सभी हाल ही में खुले ऐप्स की थंबनेल्स आ जाती हैं, जिससे मल्टीटास्किंग और भी आसान हो जाती है।
आईफोन और एंड्रॉइड दोनों में बुनियादी कार्य समान हैं, लेकिन कुछ छोटे-छोटे अंतर भी हैं। जैसे एंड्रॉइड में आप स्क्रीन के किसी भी किनारे से स्वाइप करके वापस जा सकते हैं, वहीं आईफोन में आपको बाएं से दाएं स्वाइप करना होता है। यह जेस्चर सिस्टम उन यूजर्स के लिए काफी मददगार है जो एक साथ कई ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं और तेजी से काम करना चाहते हैं।







