इस्लामाबाद की शिया मस्जिद कस्त्र ए खदीजतुल कुब्रा में शुक्रवार की नमाज के दौरान एक भयंकर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें कम से कम 31 लोग मारे गए और 170 से ज्यादा लोग घायल हो गए। यह हमला पाकिस्तान के सांप्रदायिक माहौल पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस हमले ने देश में शिया समुदाय की मस्जिदों और उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हमले के बाद इस्लामाबाद में आपातकालीन स्थिति घोषित कर दी गई है और घायलों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
पाकिस्तान में शिया और सुन्नी मस्जिदों का आंकड़ा
पाकिस्तान में सुन्नी मस्जिदों की संख्या शिया मस्जिदों से काफी अधिक है, जो देश की मुस्लिम आबादी की संरचना को दर्शाता है। अमेरिकी विदेश विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान की लगभग 96% आबादी मुस्लिम है, जिनमें से 80 से 90 प्रतिशत सुन्नी हैं और मात्र 10 से 20 प्रतिशत शिया हैं। इसलिए देश भर में सुन्नी मस्जिदों की संख्या स्वाभाविक रूप से ज्यादा है। पाकिस्तान में लगभग 6 लाख से अधिक मस्जिदें और मदरसे हैं, जिनमें अधिकांश सुन्नी संप्रदाय से जुड़े हैं, खासकर बरेली और देवबंदी विचारधारा से। हालांकि कुछ इलाकों जैसे गिलगित-बाल्टिस्तान, कुर्रम जिले, कराची और लाहौर के कुछ हिस्सों में शिया समुदाय की संख्या अधिक है और वहां शिया मस्जिदें मजबूत हैं।
सांप्रदायिक तनाव और शिया मस्जिदों पर हमले
शिया समुदाय अल्पसंख्यक होने की वजह से चरमपंथी और आतंकवादी समूहों के निशाने पर अधिक रहता है। बीते कुछ वर्षों में शिया मस्जिदों, जुलूसों और धार्मिक आयोजनों पर कई बार हमले हो चुके हैं। यह हमला भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है कि धार्मिक तनाव और असहिष्णुता के चलते शिया समुदाय की सुरक्षा खतरे में है। पाकिस्तान में इस प्रकार की हिंसा ने देश के भीतर सांप्रदायिक सौहार्द को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ऐसे हमलों से न केवल स्थानीय समुदायों में डर बना रहता है, बल्कि देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चुनौती बढ़ जाती है।
इस्लामाबाद में पहले भी हो चुके हैं धमाके
यह हमला इस्लामाबाद में पहले से हो चुके आतंकी घटनाओं की याद दिलाता है। 11 नवंबर 2025 को इसी शहर के जी 11 इलाके में जिला और सेशंस कोर्ट के बाहर भी एक सुसाइड ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 12 लोग मारे गए और 30 से ज्यादा घायल हुए थे। उस हमले को लेकर पाकिस्तान ने भारत पर आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने पूरी तरह से खारिज कर दिया था। वर्तमान हमले के बाद भी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और जांच शुरू कर दी गई है। देश में बढ़ते आतंकी खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और हालात पर लगातार नजर रख रही हैं।







