आज के डिजिटल युग में साइबरक्राइम लगातार बढ़ रहा है और डेटा चोरी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपयोगकर्ताओं को हमेशा यूनिक पासवर्ड का उपयोग करना चाहिए और उन्हें नियमित रूप से बदलते रहना चाहिए। लेकिन अगर आप अब भी पासवर्ड पर ही भरोसा कर रहे हैं, तो आप समय के साथ पीछे रह गए हैं। पासवर्ड अब डेटा लीक और हैकिंग से बचाव के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी कारण विशेषज्ञ अब पासकी (Passkey) का इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं।
कंपनियां बढ़ा रही हैं पासकी का महत्व
कुछ साल पहले Fast Identity Online Alliance (FIDO) ने पासकी का विकास किया था और अब कई बड़ी कंपनियां इसे अपनाने लगी हैं। उदाहरण के लिए, माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले अगस्त में अपने ऑथेंटिकेटर ऐप से पासवर्ड सपोर्ट हटाकर पासकी सपोर्ट जोड़ दिया। इसी तरह, अमेज़न और अन्य कंपनियां भी पासकी को बढ़ावा दे रही हैं। कंपनियों का मानना है कि पासकी उपयोगकर्ताओं की ऑनलाइन सुरक्षा को पारंपरिक पासवर्ड से कहीं अधिक मजबूत बनाती हैं और उन्हें साइबर हमलों से सुरक्षित रखती हैं।
पासकी क्या है और कैसे काम करती है
पासकी एक क्रिप्टोग्राफिक तकनीक है जो पब्लिक और प्राइवेट की के संयोजन से बनती है। आपके अकाउंट को अनलॉक करने के लिए पासकी का इस्तेमाल किया जाता है। इसका तरीका कुछ इस प्रकार है: आपकी यूनिक पब्लिक की वेबसाइट या ऐप पर स्टोर रहती है, जबकि प्राइवेट की आपके डिवाइस में स्टोर होती है। अगर आप Apple यूज़र हैं, तो यह iCloud Keychain में भी सुरक्षित रहती है। जब आप अपने अकाउंट में लॉगिन करते हैं, तो डिवाइस आपकी पहचान प्रमाणित करता है और पब्लिक और प्राइवेट की मिलकर आपका अकाउंट अनलॉक करती हैं।
पासकी के फायदे और सुरक्षा लाभ
पासकी कई मायनों में पारंपरिक पासवर्ड से बेहतर हैं। सबसे पहले, इन्हें अनुमानित नहीं किया जा सकता और न ही इन्हें साझा किया जा सकता है। दूसरा, हर वेबसाइट के लिए अलग पासकी होने के कारण फ़िशिंग हमलों से बचाव संभव है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण, अगर किसी कंपनी के सर्वर या डेटाबेस से डेटा लीक हो जाए, तो पासकी चोरी नहीं की जा सकती। इसका मतलब यह है कि पासकी आपके अकाउंट की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पासवर्ड से कहीं अधिक भरोसेमंद है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में पासकी पूरी तरह से पासवर्ड की जगह ले सकती हैं।







