TRAI का नया प्रस्ताव बदल सकता है यूजर्स और टेलीकॉम कंपनियों की कॉलिंग प्रक्रिया

By: MPLive Team

On: Thursday, February 12, 2026 5:35 PM

TRAI का नया प्रस्ताव बदल सकता है यूजर्स और टेलीकॉम कंपनियों की कॉलिंग प्रक्रिया
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दूरसंचार नियामक TRAI ने फर्जी कॉल्स और ऑनलाइन फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए एक नया प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें AI तकनीक का इस्तेमाल कर यूजर्स के मोबाइल नंबर पर आने वाले संदिग्ध कॉल्स को ऑटोमैटिकली डिटेक्ट किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार, अगर किसी कॉल या नंबर को फ्रॉड या स्पैम के रूप में पहचाना जाता है, तो बिना किसी शिकायत के ही उस सिम को ब्लॉक किया जा सकेगा। TRAI का उद्देश्य है कि यूजर्स को स्पैम और फ्रॉड कॉल्स से तुरंत राहत मिल सके और धोखाधड़ी की घटनाओं को कम किया जा सके।

क्या है TRAI का नया प्रस्ताव?

ET टेलीकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा नियमों के तहत किसी नंबर पर कार्रवाई तभी होती थी जब कम से कम 5 शिकायतें 10 दिनों में दर्ज हों। नए प्रस्ताव में TRAI ने इस प्रक्रिया को और सख्त करने का सुझाव दिया है। अब AI फिल्टर के जरिए किसी भी संदिग्ध नंबर को बिना शिकायत के ही ब्लॉक किया जा सकेगा। दूरसंचार विभाग ने इस प्रस्ताव पर इंडस्ट्री से सुझाव मांगे हैं। Jio, Airtel, Vi और BSNL जैसी कंपनियां पहले ही 10 दिनों में स्पैम नंबरों की सेवा बंद कर देती हैं। AI तकनीक आने के बाद यह प्रक्रिया और तेज और स्वत: हो जाएगी।

स्पैम कॉल्स के आंकड़े और समस्या की गंभीरता

दूरसंचार विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में स्पैम कॉल्स की शिकायतें रिकॉर्ड 3.34 लाख तक पहुंच गई थीं, जबकि फरवरी 2025 में यह संख्या केवल 1.16 लाख थी। टेलीकॉम कंपनियां हर महीने लगभग 30 से 40 करोड़ कॉल्स को संदिग्ध मानती हैं, लेकिन यूजर्स केवल 10 हजार शिकायतें प्रतिदिन दर्ज करते हैं। इस बड़े गैप को भरने के लिए TRAI ने AI आधारित ऑटोडिटेक्शन की योजना बनाई है। इसका लक्ष्य है कि हर संदिग्ध कॉल को तुरंत पहचाना जा सके और धोखाधड़ी की घटनाओं को रोकने में मदद मिले।

स्टेकहोल्डर्स के कमेंट्स और संभावित चुनौतियां

हालांकि, TRAI के इस प्रस्ताव से कुछ सर्विसेज और ऑनलाइन डिलीवरी एजेंट्स को परेशानी हो सकती है। AI तकनीक द्वारा उनके कॉल्स को भी स्कैम माना जा सकता है और सिम ब्लॉक होने का खतरा बन सकता है। TRAI फिलहाल स्टेकहोल्डर्स के कमेंट्स का इंतजार कर रहा है ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके। नियामक का उद्देश्य है कि यूजर्स को सुरक्षा मिले, लेकिन जरूरी कॉल्स प्रभावित न हों। इसके लिए भविष्य में नियमों में संशोधन और संतुलन बनाने पर विचार किया जाएगा।

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