भारत-इजरायल संभावित रक्षा समझौता: नई तकनीक से मजबूत होगी हवाई सुरक्षा

By: MPLive Team

On: Sunday, February 22, 2026 3:11 PM

भारत-इजरायल संभावित रक्षा समझौता: नई तकनीक से मजबूत होगी हवाई सुरक्षा
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दुनिया में युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि नई तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे से पहले चर्चा है कि भारत और इजरायल के बीच एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम और लेजर हथियारों पर बड़ा समझौता हो सकता है। इस समझौते के बाद भारत की हवाई सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो सकती है।

एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम और काम करने का तरीका

एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम (ABMD) एक बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली है जो दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए बनाई गई है। बैलिस्टिक मिसाइलें लंबी दूरी तय करती हैं और तेज रफ्तार से लक्ष्य की ओर गिरती हैं। इस सिस्टम में रडार, कमांड सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइल मुख्य भूमिका निभाते हैं। रडार मिसाइल लॉन्च होते ही उसे ट्रैक करता है। कमांड सेंटर खतरे का आकलन कर इंटरसेप्टर मिसाइल को दागने का आदेश देता है। इंटरसेप्टर हवा में जाकर दुश्मन की मिसाइल को हिट टू किल तकनीक से नष्ट कर देता है। भारत पहले से ही दो-स्तरीय ABMD सिस्टम विकसित कर रहा है और इजरायल के सहयोग से इसे और मजबूत किया जा सकता है।

लेजर हथियार और आयरन बीम सिस्टम की ताकत

इजरायल का लेजर डिफेंस सिस्टम आयरन बीम सबसे एडवांस सिस्टम माना जाता है। यह पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर से अलग तरीके से काम करता है और प्रकाश की गति से लक्ष्य पर हमला करता है। इसकी खासियत इसकी लागत है, क्योंकि इसमें मिसाइल की जगह बिजली का इस्तेमाल होता है। यह सिस्टम ड्रोन, रॉकेट और मोर्टार हमलों को हवा में ही निष्क्रिय कर सकता है। छोटे और तेजी से आने वाले टारगेट को यह सटीक निशाना बनाता है। पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में लेजर सिस्टम समय और संसाधनों की दृष्टि से अधिक प्रभावी और किफायती माना जाता है।

भारत के लिए रणनीतिक महत्व

अगर भारत और इजरायल का यह रक्षा समझौता होता है, तो भारत की बहु-स्तरीय एयर डिफेंस प्रणाली और मजबूत हो सकती है। बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन और रॉकेट जैसे विभिन्न खतरों से निपटने के लिए एक इंटीग्रेटेड सिस्टम तैयार किया जा सकता है। बदलते युद्ध के दौर में तकनीक ही सबसे बड़ा हथियार बन गई है। एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और लेजर हथियारों का मेल आने वाले समय में हवाई सुरक्षा का नया मानक तय कर सकता है। यह समझौता सिर्फ रक्षा क्षेत्र में निवेश नहीं, बल्कि भारत की भविष्य की सुरक्षा रणनीति में बड़ा कदम साबित होगा।

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