शिमला में मंगलवार रात दिल्ली और हरियाणा पुलिस की टीम ने रोहड़ू इलाके से यूथ कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और उन्हें दिल्ली ले जाने लगी। बुधवार सुबह हिमाचल पुलिस ने रास्ते में दिल्ली पुलिस की गाड़ियों को रोककर पूछताछ की। मामला शिमला जिला अदालत तक जा पहुंचा। हिमाचल पुलिस ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी बिना पूर्व सूचना और अनुमति के की गई। देर रात तक कानूनी बहस के बाद दिल्ली पुलिस को ट्रांजिट रिमांड मिल गया और आरोपियों को दिल्ली ले जाया गया।
दूसरे राज्य से गिरफ्तारी के नियम
भारत में एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जाकर गिरफ्तारी कर सकती है, लेकिन इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत कुछ अनिवार्य कदम तय किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने डी.के. बसु बनाम राज्य मामले में गिरफ्तारी को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन दी थीं। इन नियमों का पालन हर राज्य की पुलिस को करना होता है ताकि गिरफ्तारी पारदर्शी और कानूनी रूप से सही हो।
इंटर-स्टेट गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया
इंटर-स्टेट गिरफ्तारी के लिए सबसे पहले जिस राज्य में गिरफ्तारी करनी है वहां के स्थानीय थाने को सूचना देना जरूरी है। कई मामलों में स्थानीय पुलिस की मदद भी ली जाती है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को उस राज्य के नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है। मजिस्ट्रेट से ट्रांजिट रिमांड लेने के बाद ही आरोपी को दूसरे राज्य ले जाया जा सकता है। गिरफ्तारी की पूरी एंट्री स्थानीय पुलिस स्टेशन की डायरी में दर्ज की जाती है। इसके अलावा गिरफ्तारी करने वाले अधिकारी वर्दी में हों, उनके पास पहचान पत्र हो और वे अपनी पहचान स्पष्ट करें।
नियम तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई
अगर कोई पुलिस टीम बिना स्थानीय पुलिस को बताए और बिना ट्रांजिट रिमांड लिए आरोपी को दूसरे राज्य ले जाती है, तो ऐसी गिरफ्तारी अवैध मानी जा सकती है। ऐसी स्थिति में संबंधित पुलिस अधिकारियों पर अपहरण, गैरकानूनी हिरासत या अन्य गंभीर आरोप दर्ज हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन अदालत की अवमानना माना जा सकता है। इसके अलावा विभागीय जांच, निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना भी रहती है।







