मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। बीते 24 घंटों में इजरायल ने ईरान पर करीब 1200 मिसाइलें दागी हैं, जबकि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस बढ़ते तनाव के बीच सवाल उठता है कि कौन सा देश अपनी सीमाओं को सबसे बेहतर तरीके से सुरक्षित रख सकता है। एयर डिफेंस सिस्टम यानी वायु रक्षा प्रणाली इस स्थिति में किसी भी देश की पहली सुरक्षा ढाल बन चुका है।
एयर डिफेंस सिस्टम क्या होता है?
एयर डिफेंस सिस्टम वह तकनीकी ढांचा है जो दुश्मन के मिसाइल, ड्रोन, फाइटर जेट और रॉकेट को हवा में ही रोकने या नष्ट करने के लिए बनाया जाता है। इसमें रडार, सेंसर, कमांड कंट्रोल सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइल शामिल होते हैं। रडार पहले लक्ष्य का पता लगाता है, कंट्रोल सेंटर खतरे का आकलन करता है और इंटरसेप्टर मिसाइल द्वारा उसे नष्ट किया जाता है। आधुनिक युद्ध में पहला हमला अक्सर आसमान से होता है, इसलिए एयर डिफेंस किसी भी देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है।
इजरायल के पास दुनिया की सबसे चर्चित मल्टी-लेयर डिफेंस प्रणाली है। इसमें आयरन डोम, David’s Sling, Arrow-3 और Iron Beam शामिल हैं। आयरन डोम छोटे रॉकेट और शॉर्ट रेंज मिसाइल को रोकता है, जबकि Arrow-3 लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल को अंतरिक्ष के पास नष्ट करता है। Iron Beam लेजर आधारित सिस्टम है और कम लागत में तेज प्रतिक्रिया देता है। वहीं ईरान ने S-300 PMU2, Bavar-373, खोरदाद-15 और सेवोम खोरदाद जैसे घरेलू और खरीदे हुए सिस्टम विकसित किए हैं। ईरान की संख्या में अधिक मिसाइलें हैं, लेकिन तकनीकी स्तर में इजरायल से पीछे मानी जाती हैं।
दोनों देशों की वायुसेना और तकनीकी तुलना
इजरायल के पास लगभग 600 आधुनिक विमान हैं, जिनमें F-35I Adir और F-16I शामिल हैं। F-35 स्टील्थ तकनीक वाला विमान है, जो मिसाइल से बचने में सक्षम है। वहीं ईरान के पास 500 से ज्यादा विमान हैं, लेकिन इनमें कई पुराने मॉडल शामिल हैं। तकनीकी विशेषज्ञ मानते हैं कि मल्टी-लेयर सुरक्षा, सफलता दर और आधुनिक तकनीक के आधार पर इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम ज्यादा उन्नत है। ईरान की संख्या में ताकत है, लेकिन उसकी तकनीक इजरायल से एक स्तर पीछे मानी जाती है।







