दुनिया में शिया मुसलमानों की संख्या और भारत में उनके बसे प्रमुख क्षेत्र की जानकारी

By: MPLive Team

On: Monday, March 2, 2026 3:39 PM

दुनिया में शिया मुसलमानों की संख्या और भारत में उनके बसे प्रमुख क्षेत्र की जानकारी
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मिडिल ईस्ट में हालिया तनाव के बीच शिया और सुन्नी समुदायों पर फिर चर्चा तेज हो गई है। अनुमान के अनुसार पूरी दुनिया में शिया मुसलमानों की संख्या लगभग 20 से 26 करोड़ के बीच है। यह संख्या कुल मुस्लिम आबादी का करीब 10 से 13 प्रतिशत हिस्सा बनाती है। यानी दुनिया के हर 100 मुसलमानों में लगभग 10 से 13 शिया हैं। शिया समुदाय विभिन्न देशों में फैला हुआ है, लेकिन कुछ देशों में इनकी संख्या खासा अधिक है।

शिया आबादी वाले प्रमुख देश

शिया मुसलमानों के मामले में ईरान सबसे ऊपर है। यहां लगभग 8 से 8.5 करोड़ शिया मुसलमान रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा हैं। ईरान आधिकारिक रूप से शिया बहुसंख्यक इस्लामिक गणराज्य है। इसके बाद भारत आता है, जहां करीब 3 से 5 करोड़ शिया मुसलमान हैं। भारत में शिया मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 10 से 15 प्रतिशत मानी जाती है। मुख्यतः उत्तर प्रदेश, बिहार, कश्मीर, हैदराबाद और लखनऊ में शिया संस्कृति का केंद्र है। पाकिस्तान, इराक, अजरबैजान, बहरीन, और लेबनान में भी शिया समुदाय की संख्या महत्वपूर्ण है।

अन्य देशों में शिया समुदाय और अल्पसंख्यक स्थिति

यमन, अफगानिस्तान, और तुर्किए में भी शिया मुसलमान रहते हैं। यमन में करीब 35 से 45 प्रतिशत आबादी शिया है, ज्यादातर जैदी संप्रदाय से जुड़े लोग। अफगानिस्तान में शिया मुसलमान कुल आबादी का 10 से 15 प्रतिशत हैं। तुर्किए में 1 से 2 करोड़ शिया मुसलमान हैं, जिसमें बड़ी संख्या अलेवी समुदाय की है। इसके अलावा, जॉर्जिया में 15 से 25 प्रतिशत, बुल्गारिया में 10 से 15 प्रतिशत, और स्वीडन में 20 से 40 प्रतिशत मुस्लिम आबादी शिया मानी जाती है। इन देशों में शिया समुदाय अल्पसंख्यक की स्थिति में रहते हैं।

शिया बहुसंख्यक देश और वैश्विक प्रभाव

दुनिया में केवल चार ऐसे देश हैं जहां शिया मुसलमान बहुसंख्यक हैं। ये देश हैं ईरान, इराक, अजरबैजान और बहरीन। इन देशों में शिया आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है। बाकी देशों में शिया मुस्लिम अल्पसंख्यक के रूप में मौजूद हैं। वैश्विक स्तर पर शिया समुदाय की स्थिति धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। शिया-सुन्नी तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष इन देशों की स्थिरता और वैश्विक राजनीति पर भी असर डालता है।

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