गराश इलाके में भूकंप, क्या ईरान ने किया भूमिगत परमाणु परीक्षण या प्राकृतिक झटका

By: MPLive Team

On: Tuesday, March 3, 2026 4:43 PM

गराश इलाके में भूकंप, क्या ईरान ने किया भूमिगत परमाणु परीक्षण या प्राकृतिक झटका
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3 मार्च, 2026 को ईरान के गराश इलाके में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया। United States Geological Survey (USGS) ने इसकी पुष्टि की। भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। गराश, फार्स प्रांत में स्थित है और यह क्षेत्र भूकंपीय रूप से सक्रिय माना जाता है। ईरान अरेबियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव वाले क्षेत्र में आता है। इसलिए यहां 4 से 5 मैग्निट्यूड के भूकंप आम माने जाते हैं। स्थानीय लोगों ने हल्का झटका महसूस किया, लेकिन किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं मिली।

परमाणु परीक्षण और भूकंप की तुलना

कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में भूकंप को ईरान द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार भूमिगत परमाणु परीक्षण से उत्पन्न झटका विस्फोट की शक्ति पर निर्भर करता है। छोटे परीक्षणों से 3.0 से कम तीव्रता के झटके आते हैं। मध्यम स्तर के परीक्षण 4.5 से 5.5 मैग्निट्यूड तक झटका पैदा कर सकते हैं। बड़े परीक्षण से 6.0 या उससे अधिक तीव्रता के झटके आ सकते हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर कोरिया के 2016 के परमाणु परीक्षण से 5.1 तीव्रता और 2017 में 6.3 मैग्निट्यूड का झटका दर्ज हुआ था।

प्राकृतिक भूकंप और परमाणु परीक्षण में अंतर

भूकंप और परमाणु परीक्षण से उत्पन्न झटके अलग होते हैं। प्राकृतिक भूकंप में प्लेटों की टकराहट से ऊर्जा निकलती है। वहीं, परमाणु परीक्षण में अचानक विस्फोट से ऊर्जा फैलती है। वैज्ञानिक सिस्मोग्राफ मशीनों की मदद से यह पहचाना जाता है कि झटका प्राकृतिक है या परमाणु परीक्षण से। परमाणु परीक्षण में तरंगें एक बिंदु से फैलती हैं, जबकि प्राकृतिक भूकंप में तरंगें अलग पैटर्न में फैलती हैं। इसलिए भूकंप की प्रकृति से विशेषज्ञ आसानी से अंतर पहचान लेते हैं।

4.3 तीव्रता का झटका कितना खतरनाक

4.0 से 4.5 तीव्रता वाले भूकंप आमतौर पर हल्के माने जाते हैं। इससे दीवारों में हल्की दरार या मामूली नुकसान हो सकता है। बड़े पैमाने पर तबाही की संभावना कम होती है। ईरान जैसे भूकंपीय सक्रिय देश में इस स्तर के झटके सामान्य हैं। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी जारी की, लेकिन कोई बड़ा नुकसान या हताहत होने की सूचना नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह झटका किसी परमाणु परीक्षण से नहीं बल्कि प्राकृतिक कारणों से आया है।

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