देशभर में कुत्तों को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं। पालतू जानवर प्रेमियों का कहना है कि सड़क के कुत्तों की सुरक्षा जरूरी है। जानवरों की देखभाल करना अच्छा है, लेकिन इसके साथ सतर्क रहना भी जरूरी है। सिर्फ काटने से ही नहीं बल्कि कुत्ते का चाटना भी खतरनाक हो सकता है। हाल ही में लंदन में एक महिला को अपने हाथ और पैर कटवाने पड़े क्योंकि किसी कुत्ते ने उसके घाव को चाटा और उसे सेप्सिस नामक गंभीर बीमारी हो गई। यह मामला दर्शाता है कि कुत्ते के चाटने से भी गंभीर संक्रमण हो सकता है।
रैबीज और संक्रमण का खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हर साल हजारों लोग रैबीज से मरते हैं। चाहे पालतू कुत्ता काटे या सड़क का कुत्ता, तुरंत चिकित्सा सहायता लेना अनिवार्य है। इस स्थिति में एंटी-रैबीज का इंजेक्शन लगवाना बेहद जरूरी है। अगर कुछ घंटों में यह टीका नहीं लगाया गया, तो वायरस पूरे शरीर में फैल सकता है। रैबीज मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और हृदय को प्रभावित करता है, जिससे मृत्यु तक का खतरा होता है। इसलिए कुत्ते से सतर्क रहना और घाव को साफ रखना जीवनरक्षक हो सकता है।
कुत्ते का चाटना और सेप्सिस
डॉक्टरों के अनुसार, कुत्ते का चाटना भी संक्रमण का कारण बन सकता है। कुत्ते के लार में कई रोगजनक बैक्टीरिया होते हैं। अगर कोई संक्रमित कुत्ता चोट, कट, खरोंच, या आंख, नाक, मुँह को चाटता है, तो वायरस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। यह वायरस मानव के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं और रैबीज जैसी गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं। ऐसे संक्रमण से सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
सेप्सिस के लक्षण और बचाव
सेप्सिस में तेज बुखार या अत्यंत कम तापमान, हृदय की तेजी, सांस की तकलीफ, कम पेशाब, अत्यधिक थकान, त्वचा पर लाल या काले धब्बे, रक्तचाप कम होना, बेहोशी, ठंड लगना और गंभीर दर्द जैसी समस्याएँ दिखाई देती हैं। ऐसे में अगर चोट या खरोंच लगी हो, तो कुत्तों से दूर रहें। घर में पालतू कुत्ता हो तो उसे मुँह, नाक और आंखों के पास न जाने दें। कुत्ते को छूने के बाद तुरंत साबुन से हाथ धोएं। सभी सावधानियाँ अपनाना और घाव को साफ रखना संक्रमण से बचाव का सबसे सुरक्षित तरीका है।







