भारतीय क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक टी20 वर्ल्ड कप जीत की खुशी में स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या कानूनी विवाद में फंस गए हैं। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूज़ीलैंड को हराने के बाद पूरे देश में जश्न मनाया गया। इसी जश्न के दौरान पांड्या के व्यवहार को लेकर पुणे में शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई गई। उन पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का गंभीर आरोप है। यह मामला अब मैदान से पुलिस स्टेशन तक पहुंच गया है।
पुणे में FIR दर्ज होने के कारण
टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने जश्न मनाते हुए मैदान पर तिरंगा पहना। इसी दौरान हार्दिक पांड्या ने तिरंगे में लिपटे होकर अपनी गर्लफ्रेंड को किस किया। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि पांड्या ने राष्ट्रीय ध्वज को पोशाक की तरह इस्तेमाल किया और उस स्थिति में व्यक्तिगत काम किए, जिससे तिरंगे की गरिमा को ठेस पहुंची।
तिरंगे के अपमान पर कानून और नियम
भारत में राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए 1971 में ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट’ बनाया गया। इस कानून की धारा 2 का हवाला पांड्या के मामले में दिया जा रहा है। इस धारा में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर तिरंगे का अपमान करता है, जैसे इसे जलाना, फाड़ना या उसकी गरिमा को घटाने वाला इस्तेमाल करना, तो यह दंडनीय अपराध है। पुलिस यह जांच कर रही है कि पांड्या का व्यवहार जानबूझकर था या गलती से हुआ।
सजा और दंड की संभावना
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, धारा 2 के तहत दोषी पाए जाने पर कठोर सजा दी जा सकती है। यदि आरोप साबित होते हैं तो आरोपी को तीन साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है या जेल और जुर्माने दोनों का संयोजन भी हो सकता है। भारतीय न्याय प्रणाली में राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान गंभीर अपराध माना जाता है, विशेषकर जब यह लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ा हो। भारत का फ्लैग कोड 2002 स्पष्ट रूप से कहता है कि तिरंगे को कमर से नीचे पहनना या कपड़े की तरह इस्तेमाल करना कानूनन गलत है। खिलाड़ी अक्सर जीत के बाद तिरंगा कंधों पर डालते हैं, लेकिन निजी क्षणों में इसका अनुचित इस्तेमाल अपमान का मामला बन सकता है।







