अंडमान-निकोबार का चोकपॉइंट बंद होने पर तेल कीमत और वैश्विक आपूर्ति में हलचल

By: MPLive Team

On: Wednesday, March 18, 2026 6:00 PM

अंडमान-निकोबार का चोकपॉइंट बंद होने पर तेल कीमत और वैश्विक आपूर्ति में हलचल
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जैसे ईरान का स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज तेल आपूर्ति के लिए विश्व मानचित्र पर बेहद महत्वपूर्ण है, वैसे ही भारत के पास भी एक रणनीतिक “चोकपॉइंट” है। यह अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के पास स्थित है और स्ट्रेट ऑफ़ मलक्का का मुख्य प्रवेश द्वार है। यह मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार का केंद्र है। भारत द्वारा इस क्षेत्र में सैन्य और व्यावसायिक क्षमताओं को मजबूत करना चीन के लिए चिंता का विषय बन गया है। यदि भारत इस महत्वपूर्ण मार्ग पर अपना नियंत्रण सख्त करता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में भूकंप जैसी हलचल पैदा कर सकता है।

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: भारत की रणनीतिक चाल

भारत सरकार “ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट” और “गैलेथिया बे पोर्ट” जैसी पहलों के माध्यम से अंडमान और निकोबार क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत कर रही है। यह सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि एक रणनीतिक किला है। यहां निर्मित अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल चीन के लिए “मिनी-हॉर्मुज” जैसा चुनौतीपूर्ण स्थल बन सकता है। परियोजना पूरी होने के बाद भारत विशाल कार्गो जहाजों को सेवाएं देने के साथ-साथ इस पूरी समुद्री मार्ग पर सतर्क निगरानी रख सकेगा। इसके चलते चीनी नौसेना के लिए यह सबसे बड़ा अवरोध बन गया है।

मलक्का दुविधा और वैश्विक असर

चीन अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए पूरी तरह से मलक्का मार्ग पर निर्भर है, जिसे उसने “मलक्का दुविधा” कहा है। यदि भारत चाहकर इस मार्ग को ब्लॉक करता है, तो चीन को तेल की भारी कमी का सामना करना पड़ेगा। इससे उसका उद्योग और सैन्य क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं, भारत खुद भी हॉर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर है, जिससे यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि अंडमान क्षेत्र में उसकी शक्ति संतुलित रहे। इस रणनीति का मकसद केवल नियंत्रण रखना है, न कि मार्ग को बंद करना।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव

यदि यह समुद्री मार्ग बंद हो जाए, तो जहाजों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ेगा, जिससे समय और लागत में भारी वृद्धि होगी। तेल की कीमतें रातोंरात बढ़ेंगी और वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ जाएगा। कच्चे माल और खाद्य सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने से महंगाई और खाद्य सुरक्षा पर संकट बढ़ेगा। इसके अलावा, बीमा प्रीमियम में वृद्धि से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी। भारत के लिए भी इसके दुष्प्रभाव होंगे, लेकिन रणनीति का उद्देश्य मार्ग सुरक्षित रखना और भारतीय महासागर में प्रभुत्व बनाए रखना है।

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