खाड़ी युद्ध के बाद भारत में इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में अचानक 22 रुपये की बढ़ोतरी

By: MPLive Team

On: Friday, March 20, 2026 6:23 PM

खाड़ी युद्ध के बाद भारत में इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में अचानक 22 रुपये की बढ़ोतरी
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खाड़ी देशों में जारी भीषण युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में तहलका मचा दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत में इसका असर एलपीजी, पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति की अनिश्चितता के रूप में सामने आया है। इस संकट के बीच प्रमुख तेल कंपनियों IOCL, BPCL और HPCL ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2.09 से 2.35 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि की है। औद्योगिक डीजल की कीमतें 87.67 रुपये से बढ़कर 109.59 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं।

इंडस्ट्रियल डीजल और सामान्य डीजल में अंतर

अक्सर लोग इंडस्ट्रियल डीजल और सामान्य डीजल को एक ही समझते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से यह बिल्कुल अलग हैं। इंडस्ट्रियल डीजल, जिसे हाई-स्पीड डीजल (HSD) भी कहा जाता है, अधिक रिफाइंड होता है। इसका सिटेन नंबर उच्च होता है, जिससे यह भारी और जटिल इंजनों में तेजी से और कुशलतापूर्वक जलता है। इसमें लुब्रिकेंट और डिटर्जेंट एडिटिव्स की मात्रा अधिक होती है, जो इंजन के घिसाव को कम करती है और मशीन की उम्र बढ़ाती है। इसके विपरीत सामान्य डीजल मुख्य रूप से वाहनों के लिए डिजाइन किया गया है।

पर्यावरण और इंडस्ट्रियल डीजल की विशेषताएं

इंडस्ट्रियल डीजल में सल्फर की मात्रा कम होती है, जिससे जलने पर कम धुआं और हानिकारक गैसें निकलती हैं। यह पर्यावरण नियमों के पालन में मदद करता है। इसके उत्पादन की जटिल प्रक्रिया और उच्च रिफाइनिंग लागत के कारण इसका मूल्य सामान्य डीजल से अधिक होता है। बड़े उद्योग, जनरेटर सेट, निर्माण मशीनें और क्रेन जैसी भारी मशीनों में इसका उपयोग अनिवार्य होता है ताकि इंजन खराब न हो और उत्पादन क्षमता प्रभावित न हो।

इंडस्ट्रियल डीजल का उपयोग और बढ़ती कीमतों का असर

इंडस्ट्रियल डीजल का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स, बिजली उत्पादन संयंत्र, भारी मशीनें, जहाज और कृषि उपकरणों में होता है। खाड़ी देशों में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत में इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में 22 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर उद्योगों की उत्पादन लागत, परिवहन और बिजली उत्पादन पर सीधे पड़ेगा। सरकार ने राजस्व घाटे को कम करने और भविष्य के लिए तेल स्टॉक सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया है।

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