ग्वालियर, मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। 16 साल बाद, न्यायालय ने 51 अवैध कॉलोनियां बनाने वाले 79 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश अवैध कॉलोनाइजरों को भयभीत कर दिया है।
कलेक्टर कोर्ट ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि वे इन आरोपियों के खिलाफ अपने-अपने क्षेत्रों में आपराधिक मामले दर्ज कर कार्रवाई करें। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध रूप से बनाई गई कॉलोनियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जिन खाली प्लॉट्स अभी तक बिके नहीं हैं, उन पर प्रशासन की इस कार्रवाई का सबसे बड़ा प्रभाव पड़ेगा। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ऐसे सभी प्लॉट्स को कॉलोनाइजरों से वापस ले लेगी। साथ ही, जिन लोगों ने पहले ही इन कॉलोनियों में प्लॉट खरीद लिए हैं, उन्हें फिलहाल कोई राहत नहीं मिलेगी, इससे खरीदारों की चिंता बढ़ गई है।
अधिकारियों ने बताया कि अवैध कॉलोनियों को लेकर पहले ही कई बार जनता को चेतावनी दी गई थी। लोगों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई कि वे बिना वैध अनुमति वाली कॉलोनियों में निवेश न करें। इतना ही नहीं, संबंधित जमीन की खसरा-खतौनी के कॉलम नंबर 12 में अवैध कॉलोनी का उल्लेख किया गया था. ऐसा करने से किसी भी खरीदार को जोखिम का पता चलता था।
नियमों के बावजूद, कॉलोनाइजरों ने अवैध रूप से प्लॉट काटकर बेचना जारी रखा। जब मामला कलेक्टर न्यायालय में पहुंचा, प्रत्येक आरोपी को सुनवाई का अवसर मिला। हालाँकि, कोई भी कॉलोनाइजर अपनी कॉलोनी को वैध साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं दे सका। कलेक्टर कोर्ट ने विभिन्न एसडीएम द्वारा प्रस्तुत मामलों पर सुनवाई करते हुए कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया।
प्रशासन कहता है कि अवैध कॉलोनियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर न्यायालय में अभी भी ऐसे ही 152 अन्य प्रकरणों पर सुनवाई चल रही है। इन मामलों में भी आने वाले समय में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
अब तक मुरार के धनेली, करिगवां, बेरजा और सुनारपुरा, ग्वालियर शहर के ओड़पुरा, सुसैरा, कुलैथ, जिगसौली और इकहरा के अलावा घाटीगांव और मोहना क्षेत्रों में कार्रवाई की गई है।







