जल संरक्षण का महाअभियान: अदाणी फाउंडेशन बनाएगा 15 नए तालाब, 10 जलाशयों का होगा जीर्णोद्धार, हजारों किसानों को राहत

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सरई, माडा और बरगवां तहसीलों में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत शुरू हुआ काम, सिंचाई और भूजल स्तर सुधारने पर फोकस

एमपी के सिंगरौली जिले में Adani फाउंडेशन ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत सिंगरौली जिले में जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरई, माडा एवं बरगवां तहसील के विभिन्न गांवों में 15 नए तालाबों के निर्माण और 10 पुराने जलाशयों के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कर दिया गया है। इस पहल से हजारों किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर जल उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

किसानों को मिलेगा फायदा

जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित शासकीय अधिकारियों के सहयोग से जल संरचनाओं के लिए स्थलों की पहचान की गई है। फाउंडेशन द्वारा धिरौली, बजौड़ी, खनुआ टोला, डोंगरी, बाईसा बूढ़ा, रैला, बंधौरा, नगवा, खैराही, करसुआराजा, मझौली एवं तीनगुड़ी सहित कई गांवों में नए तालाबों का निर्माण कराया जाएगा। वहीं धिरौली, डोंगरी, उतानी पाठ, जमगढ़ी, सुहीरा, अमिलिया, बंधौरा, बेतरिया, चौरा, उज्जैनी, देवरा एवं गोरा गांवों में पुराने जलाशयों का पुनर्जीवन किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका

इन जलाशयों के निर्माण और पुनर्जीवन से न केवल सिंचाई सुविधा मजबूत होगी, बल्कि भूजल स्तर सुधारने में भी मदद मिलेगी। वर्तमान में कई पारंपरिक जल स्रोत उपेक्षा, अतिक्रमण और प्रदूषण के कारण समाप्ति के कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसे में जल संरचनाओं का पुनर्जीवन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगा।

फाउंडेशन द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक करते हुए जल स्रोतों के रखरखाव में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए यह पहल शुरू की गई है, जिससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ने की संभावना है।

गौरतलब है कि पहले ग्रामीण जीवन में तालाब पेयजल, सिंचाई और धार्मिक गतिविधियों का मुख्य आधार हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ इनका महत्व कम होता गया। रखरखाव की कमी और घटते जल स्तर के कारण कई तालाब गड्ढों में तब्दील हो गए हैं। ऐसे में इन जल स्रोतों का संरक्षण स्थानीय संस्कृति, परंपरा और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।

अदाणी फाउंडेशन की इस पहल को क्षेत्रीय ग्रामीणों ने सराहा है और इसे जल संकट से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। आने वाले समय में इन जलाशयों से संचित पानी किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है।

देवेन्द्र पाण्डेय "संपादक"

ऋषि श्रृंगी मुनि की तपोभूमि सिंगरौली की पावन धरा से निकला. पठन-पाठन से प्यार था लिहाजा पत्रकारिता से बेहतर पेशा कोई और लगा नहीं. अखबार से शुरु हुआ सफर टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यम में जारी है. इस दौरान करीब 14 साल गुजर गए पता ही नहीं चला. Read More
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