म्यूचुअल फंड में फंसने से बचना है? निवेश से पहले जान लें ये छुपे हुए फैक्ट्स

By: MPLive Team

On: Friday, July 18, 2025 9:03 AM

म्यूचुअल फंड में फंसने से बचना है? निवेश से पहले जान लें ये छुपे हुए फैक्ट्स
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आज के समय में हर कोई म्यूचुअल फंड के बारे में जानता है। इसके बेहतर और आकर्षक रिटर्न के कारण हर कोई इसमें निवेश करना चाहता है। यदि आप भी आने वाले समय में म्यूचुअल फंड में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अक्सर निवेशक केवल पिछले सालों में दिए गए रिटर्न को देखकर निवेश का निर्णय लेते हैं, जो कि एक बड़ी गलती है। म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले हमें कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातों को भी समझना चाहिए, ताकि निवेश से अच्छा रिटर्न प्राप्त किया जा सके और जोखिम भी कम किया जा सके।

फंड के प्रदर्शन को समझें और तुलना करें

जब भी आप किसी म्यूचुअल फंड में निवेश करने का विचार करें, तो सिर्फ 1, 2 या 3 साल के रिटर्न को देखकर निर्णय न लें। हमेशा यह देखें कि फंड ने विभिन्न वर्षों में कैसा प्रदर्शन किया है। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि फंड कितनी स्थिरता और निरंतरता के साथ रिटर्न देने में सक्षम है। इसके अलावा, अलग-अलग समय में फंड ने बाजार की गिरावट और तेजी में कैसा प्रदर्शन किया, यह भी देखना जरूरी है। फंड का प्रदर्शन लंबे समय में कितना मजबूत रहा है, यह उसकी गुणवत्ता को दिखाता है, जिससे आपको बेहतर निवेश निर्णय लेने में आसानी होगी।

म्यूचुअल फंड में फंसने से बचना है? निवेश से पहले जान लें ये छुपे हुए फैक्ट्स

चार्जेस पर भी रखें नजर

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय कई तरह के चार्जेस लगते हैं, जिन पर हम अक्सर ध्यान नहीं देते। इन चार्जेस में एक्सपेंस रेशियो, एग्जिट लोड, मैनेजमेंट फीस आदि शामिल होते हैं। आम तौर पर, अगर कोई निवेशक एक साल के भीतर पैसे निकालता है, तो कंपनी एग्जिट लोड चार्ज करती है। इसलिए, निवेश करने से पहले इन चार्जेस की जानकारी अच्छे से ले लें और देखें कि कौन सा फंड कम खर्च में बेहतर रिटर्न दे रहा है। अगर किसी फंड में चार्जेस ज्यादा हैं, तो इससे आपके रिटर्न में कमी आ सकती है, इसलिए उन फंड्स का चयन करें जिनमें चार्जेस कम हों और रिटर्न स्थिर हों।

जोखिम को समझें और अपनी क्षमता अनुसार निवेश करें

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय जोखिम का आकलन करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए आप शार्प रेशियो, स्टैंडर्ड डिविएशन और बीटा जैसे विकल्पों की मदद ले सकते हैं, जिससे यह पता चलेगा कि फंड में कितना जोखिम है। शार्प रेशियो से यह पता चलता है कि फंड कितना अतिरिक्त रिटर्न दे रहा है, वहीं बीटा से यह पता चलता है कि फंड बाजार के उतार-चढ़ाव से कितना प्रभावित होगा। अपने रिस्क प्रोफाइल के अनुसार ही फंड में निवेश करना बेहतर होता है। अगर आप अधिक जोखिम लेने में सक्षम नहीं हैं, तो कम जोखिम वाले फंड का चयन करें। वहीं, अगर आप लंबे समय के लिए निवेश कर रहे हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव को संभाल सकते हैं, तो उच्च जोखिम वाले फंड में भी निवेश कर सकते हैं।

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