स्विट्ज़रलैंड की दिग्गज कंपनी में भूचाल! अफेयर के चलते CEO Laurent Frakes को गंवानी पड़ी कुर्सी

By: MPLive Team

On: Tuesday, September 2, 2025 6:32 PM

स्विट्ज़रलैंड की दिग्गज कंपनी में भूचाल! अफेयर के चलते CEO Laurent Frakes को गंवानी पड़ी कुर्सी
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स्विट्ज़रलैंड की बहुराष्ट्रीय कंपनी नेस्ले के सीईओ लॉरेंट फ्रेक्स को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। कंपनी ने तत्काल प्रभाव से उन्हें बर्खास्त कर दिया, जब यह खुलासा हुआ कि उनका संबंध उनकी प्रत्यक्ष अधीनस्थ स्टाफ से था। कंपनी ने कहा कि यह निर्णय किसी जल्दबाज़ी में नहीं बल्कि एक विस्तृत जांच के बाद लिया गया है। नेस्ले ने साफ किया कि सीईओ का अपनी व्यक्तिगत सहायक (PA) के साथ रोमांटिक रिलेशन रखना कंपनी के बिजनेस कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है।

जांच और बोर्ड का निर्णय

कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह जांच चेयरमैन पॉल बुल्के की निगरानी में हुई, जिसका नेतृत्व स्वतंत्र निदेशक पाब्लो इस्ला ने किया। इस दौरान उन्हें एक बाहरी काउंसिल की मदद भी मिली। पॉल बुल्के ने कहा कि यह कदम जरूरी था क्योंकि नेस्ले के मूल्य और गवर्नेंस ही कंपनी की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने लॉरेंट फ्रेक्स की सेवाओं के लिए धन्यवाद भी दिया। फ्रेक्स की बर्खास्तगी के तुरंत बाद कंपनी ने नेस्प्रेसो के सीईओ फिलिप नेवराटिल को नई जिम्मेदारी सौंप दी। इससे कंपनी ने संकेत दिया कि वह किसी भी तरह से अपनी साख और मानकों से समझौता नहीं करना चाहती।

स्विट्ज़रलैंड की दिग्गज कंपनी में भूचाल! अफेयर के चलते CEO Laurent Frakes को गंवानी पड़ी कुर्सी

लॉरेंट फ्रेक्स का करियर सफर

लॉरेंट फ्रेक्स ने नेस्ले में लंबा कार्यकाल बिताया है। उन्होंने 1986 में कंपनी जॉइन की और कई अहम पदों पर काम किया। 2014 तक वे यूरोपीय परिचालन (European Operations) के प्रमुख रहे। इसके बाद वे लैटिन अमेरिका डिवीजन के हेड बने और फिर सीईओ के पद तक पहुंचे। लंबे अनुभव और योगदान के बावजूद, कंपनी ने उनके खिलाफ कठोर कदम उठाया। यह घटना नेस्ले की कॉरपोरेट गवर्नेंस और एथिक्स पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि, कंपनी ने त्वरित कार्रवाई करके अपनी छवि को बचाने की कोशिश की है।

कंपनी की छवि और निवेशकों पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से अल्पावधि में निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है और शेयर बाज़ार पर असर पड़ सकता है, क्योंकि निवेशक प्रबंधन की स्थिरता और पारदर्शिता को खास महत्व देते हैं। हालांकि, नेस्ले की मजबूत ब्रांड वैल्यू और वैश्विक पकड़ इतनी गहरी है कि इसका दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। बल्कि, जिस तेजी से कंपनी ने सीईओ बदलने का निर्णय लिया है, वह दर्शाता है कि नेस्ले अपनी प्रतिष्ठा और गवर्नेंस मानकों पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहती। यही कारण है कि यह कदम कंपनी की दीर्घकालिक विश्वसनीयता को और मजबूत कर सकता है।

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