Groww IPO का धमाका! 7,000 करोड़ का ऑफर, फाउंडर्स बेचेंगे हिस्सेदारी, जानें पूरी डीटेल्स

By: MPLive Team

On: Wednesday, September 17, 2025 8:18 AM

Groww IPO का धमाका! 7,000 करोड़ का ऑफर, फाउंडर्स बेचेंगे हिस्सेदारी, जानें पूरी डीटेल्स
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देश के सबसे बड़े ऑनलाइन ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म में से एक Groww ने 16 सितंबर को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपने आईपीओ (IPO) के लिए आवेदन किया है। यह आईपीओ लगभग 6,000 से 7,000 करोड़ रुपये का होगा। कंपनी द्वारा फाइल किए गए अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में यह खुलासा हुआ है कि ग्रो के संस्थापक इस आईपीओ में अपनी केवल 0.07 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेंगे। बता दें कि Groww की शुरुआत साल 2016 में हर्ष जैन, ललित केशरे, ईशान बंसल और नीरज सिंह ने की थी। खास बात यह है कि चारों संस्थापक पहले ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart में काम कर चुके हैं।

संस्थापकों और हिस्सेदारी का विवरण

फिलहाल, Groww में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी लगभग 27.97 प्रतिशत है। आईपीओ के दौरान वे इसमें से केवल 0.07 प्रतिशत शेयर ही बेचेंगे। DRHP के अनुसार, कंपनी के पास 30 जून 2025 तक लगभग 18 करोड़ ट्रांजैक्शनल यूजर्स थे, जो इसकी लोकप्रियता और बड़े ग्राहक आधार को दर्शाता है। इस आईपीओ में कंपनी की ओर से लगभग 1,600 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जाएंगे। साथ ही, प्रमोटर्स 57.42 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचेंगे।

Groww IPO का धमाका! 7,000 करोड़ का ऑफर, फाउंडर्स बेचेंगे हिस्सेदारी, जानें पूरी डीटेल्स

ग्रो का वित्तीय प्रदर्शन

वित्तीय वर्ष 2026 की पहली तिमाही में Groww का प्रदर्शन बेहतर रहा। कंपनी ने 378 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया, जो पिछले साल की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, इस दौरान कंपनी का राजस्व 904 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्तीय वर्ष 2025 की पहली तिमाही में यह 1,000 करोड़ रुपये था। यानी कि कंपनी के राजस्व में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद नेट प्रॉफिट बढ़ना यह संकेत देता है कि कंपनी अपने खर्चों को नियंत्रित करने और ऑपरेटिंग मार्जिन सुधारने में सफल रही है।

व्यवसाय और संभावित जोखिम

Groww का कारोबार सिर्फ ब्रोकरेज सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मार्जिन फंडिंग और एनबीएफसी (NBFC) लेंडिंग सेवाओं में भी सक्रिय है। ऐसे में, RBI और SEBI के नियमों में किसी भी तरह का बदलाव सीधे कंपनी के बिजनेस को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा डेरिवेटिव्स सेगमेंट से आता है, जिससे यह सेक्टर-स्पेसिफिक जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है। निवेशकों के लिए यह आईपीओ एक बड़ा अवसर हो सकता है, लेकिन नियामकीय बदलाव और सेक्टर संबंधी अस्थिरता कंपनी की चुनौतियां भी बढ़ा सकते हैं।

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